बिजनेस
भारत की चिप क्रांति को बड़ी कामयाबी, डीएलआई समर्थित स्टार्टअप मेरिट ने बनाया ब्रॉडबैंड चिप ‘विहान’
भारत के सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण क्षेत्र के लिए बड़ी खबर सामने आई है। डीएलआई यानी डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना से समर्थित भारतीय चिप स्टार्टअप मेरिट ने अपने ब्रॉडबैंड चिप ‘विहान’ की पहली सिलिकॉन सफलता हासिल कर ली है। कंपनी की इस उपलब्धि को भारत में स्वदेशी चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर तकनीक के विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
भारत के सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण क्षेत्र के लिए बड़ी खबर सामने आई है। डीएलआई यानी डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना से समर्थित भारतीय चिप स्टार्टअप मेरिट ने अपने ब्रॉडबैंड चिप ‘विहान’ की पहली सिलिकॉन सफलता हासिल कर ली है। कंपनी की इस उपलब्धि को भारत में स्वदेशी चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर तकनीक के विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पहली ही कोशिश में मिली सफलता
मेरिट के मुताबिक उसके ब्रॉडबैंड चिप ‘विहान’ ने पहली बार सिलिकॉन पर सफलतापूर्वक काम किया है। सेमीकंडक्टर उद्योग में इसे ‘फर्स्ट-पास सिलिकॉन सक्सेस’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि चिप के डिजाइन को पहली बार निर्माण के लिए भेजे जाने के बाद ही वह अपेक्षित तरीके से काम करने में सफल रही। चिप डिजाइन के क्षेत्र में यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली कोशिश में सिलिकॉन सफलता मिलने से दोबारा डिजाइन, निर्माण और परीक्षण पर लगने वाला समय और खर्च कम हो सकता है।
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क्या है ‘विहान’ चिप?
‘विहान’ को ब्रॉडबैंड संचार से जुड़े उपयोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और ब्रॉडबैंड से जुड़े उपकरणों में स्वदेशी चिप तकनीक की भूमिका को मजबूत करना है। भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में घरेलू कंपनियों द्वारा चिप डिजाइन और विकास में हासिल की जा रही सफलता देश के तकनीकी आत्मनिर्भरता अभियान के लिए महत्वपूर्ण है।
डीएलआई योजना का क्या है योगदान?
मेरिट को भारत सरकार की डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना का समर्थन मिला है। इस योजना का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन से जुड़े स्टार्टअप और कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत में अत्याधुनिक चिप डिजाइन विकसित हो सकें। सरकार की कोशिश है कि भारत केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली तक सीमित न रहे, बल्कि चिप के डिजाइन और उससे जुड़ी तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत क्षमता विकसित करे।
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए क्यों खास है यह सफलता?
दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप की मांग लगातार बढ़ रही है। स्मार्टफोन, दूरसंचार उपकरण, ऑटोमोबाइल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में चिप सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। ऐसे समय में भारतीय स्टार्टअप का अपनी चिप को डिजाइन करके सिलिकॉन स्तर पर सफल करना देश के बढ़ते चिप इकोसिस्टम के लिए सकारात्मक संकेत है। ‘विहान’ की सफलता से भारत में स्वदेशी चिप डिजाइन और ब्रॉडबैंड तकनीक को आगे बढ़ाने की संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं।
हालांकि किसी चिप की पहली सिलिकॉन सफलता के बाद भी व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन, परीक्षण, प्रमाणन और बाजार में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल जैसे कई चरण बाकी होते हैं। इसलिए यह उपलब्धि महत्वपूर्ण शुरुआत है, लेकिन पूरी व्यावसायिक सफलता का अंतिम प्रमाण नहीं।
Written By: Shivani Gupta
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