Sheikh Hasina Press Conference: भारत में रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव गहरा गया है। लगभग दो सालों में पहली बार लाइव आकर मीडिया से बात करते हुए हसीना ने ऐलान किया कि वह हर कीमत पर अपने देश वापस लौटेंगी। इस आयोजन पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सख्त आपत्ति जताते हुए इसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुकसानदायक करार दिया है।
बांग्लादेश की कड़ी आपत्ति
ढाका ट्रिब्यून और बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि नई दिल्ली से पूर्व प्रधानमंत्री को मीडिया से बातचीत की इजाजत देना द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के प्रयासों के खिलाफ है।
बांग्लादेश सरकार ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘जुलाई क्रांति’ का अपमान और देश की संप्रभुता पर हमला बताया। विदेश मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया कि 2013 की भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना की वापसी के लिए बार-बार अनुरोध किए गए हैं, लेकिन भारत की तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
सरकार की कोई भूमिका नहीं
बांग्लादेश की चेतावनियों और आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस ऑनलाइन प्रेस वार्ता में भारत सरकार की कोई संलिप्तता नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रेसवार्ता की बात की जा रही है, उसका आयोजन एक निजी मीडिया संस्था द्वारा किया गया है। सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है और न ही भारत सरकार इस मंच पर व्यक्त किए गए विचारों का समर्थन करती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना के बड़े दावे
बुधवार को विदेशी मीडिया के पत्रकारों को संबोधित करते हुए शेख हसीना ने अपनी वापसी और बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर कई अहम बातें कहीं. इस दौरान शेख हसीना ने कहा कि वह इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं। मैं हमेशा बाहर नहीं रह सकती। मुझे अपने लोगों के पास जाना होगा। चाहे मुझे जेल में डाल दिया जाए या मार दिया जाए, मैं वापस जरूर जाऊंगी।
2024 के हिंसक आंदोलन पर बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि छात्रों के प्रदर्शन का इस्तेमाल संगठित आपराधिक समूहों ने सत्ता बदलने के लिए किया। हसीना ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में आज भी पत्रकारों, जजों, शिक्षाविद और आवामी लीग के कार्यकर्ताओं पर अत्याचार हो रहे हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रभाव में भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2024 में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बाद शेख हसीना को अपना पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। उनके इस ताजा बयान और भारत के रुख के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक दरार और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
Written by Shailesh Yadav