जिनेवा: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र से पहले तिब्बती प्रतिनिधियों ने जिनेवा में एक सप्ताह तक कूटनीतिक अभियान चलाकर तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है।
सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के अनुसार, दलाई लामा के प्रतिनिधि थिनले चुक्की और जिनेवा स्थित ऑफिस ऑफ तिब्बत के UN एडवोकेसी अधिकारी फुंतसोक टॉपग्याल ने 17 से 24 अगस्त के बीच 32 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
इन बैठकों में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों, विभिन्न स्थायी मिशनों, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रक्रियाओं से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की गई।
तिब्बती प्रतिनिधियों ने धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अधिकारों, पर्यावरणीय चिंताओं और तिब्बती पहचान व परंपराओं को प्रभावित करने वाली नीतियों को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं।
लॉबगा रंगजेन की मौत का मुद्दा उठाया
CTA के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर 2 जुलाई 2026 को आत्मदाह करने वाले तिब्बती कार्यकर्ता लॉबगा रंगजेन की मौत का मुद्दा भी उठाया।
प्रतिनिधियों ने कहा कि इस घटना को तिब्बती भाषा, संस्कृति, धर्म और मौलिक स्वतंत्रताओं से जुड़े व्यापक मुद्दों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
चीन की नीतियों पर जताई चिंता
तिब्बती प्रतिनिधियों ने चीन के "जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून" को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि राष्ट्रीय एकता के नाम पर ऐसी नीतियां लागू नहीं होनी चाहिए, जो अलग-अलग समुदायों की विशिष्ट पहचान और संस्कृति को प्रभावित करें।
बैठक में दलाई लामा के भविष्य के पुनर्जन्म और उत्तराधिकार, तिब्बती धार्मिक संस्थानों जैसे लारुंग गार बौद्ध अकादमी से जुड़े घटनाक्रम और तिब्बती पठार पर बढ़ रहे जलविद्युत व बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई।
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तिब्बती प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न देशों की सरकारों से तिब्बत में हो रहे घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखने और आगामी मानवाधिकार परिषद सत्र में इन मुद्दों को उठाने की अपील की है।