काठमांडू : नेपाल में भोते कोशी नदी में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद भारत और चीन की विशेष सुरंग बचाव टीमें नेपाल सेना के साथ मिलकर महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं में राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

काठमांडू में मंत्रालय की चौथी आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग में सार्वजनिक कूटनीति प्रभाग के प्रमुख एवं प्रवक्ता लोक बहादुर क्षेत्री ने कहा कि उच्च जोखिम वाले भूमिगत अभियानों के लिए अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “हमारी तत्काल राष्ट्रीय प्राथमिकता स्पष्ट है-जान बचाना, लापता लोगों का पता लगाना, जीवित बचे लोगों को बचाना, तत्काल राहत पहुंचाना और सभी प्रभावित लोगों, चाहे वे नेपाली हों या विदेशी नागरिक, को उचित सहायता और सहयोग सुनिश्चित करना।”

भारत की 24 सदस्यीय टीम दो इकाइयों में तैनात

प्रवक्ता के अनुसार, भारत की 24 सदस्यीय सुरंग बचाव टीम दो इकाइयों में काम कर रही है। यह टीम नेपाल सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग जलविद्युत परियोजना स्थलों पर अभियान चला रही है।

वहीं, चीन की 9 सदस्यीय टीम अपर त्रिशूली-3A परियोजना स्थल पर सेना के साथ समन्वय में बचाव कार्य कर रही है। दक्षिण कोरिया की एक विशेष टीम को भी अभियान में लगाया गया है।

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 21,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है।

11,800 से ज्यादा लोगों को बचाया गया

नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 11,800 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया गया है, जिनमें 324 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें से पांच विदेशी नागरिकों का अधिकारियों से अभी भी सीधा संपर्क बना हुआ है।

हालांकि, खोज और सत्यापन अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बदल रही है। मंत्रालय के मुताबिक अब तक 1,010 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 39 देशों के लगभग 590 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

शवों की पहचान के लिए भारत की DNA टीम सक्रिय

बड़ी संख्या में बरामद शवों की पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक टीमें भी नेपाल पहुंची हैं। भारत की 19 सदस्यीय फॉरेंसिक DNA टीम 29 अगस्त से नेपाल में काम कर रही है। चीन की चार सदस्यीय फॉरेंसिक टीम मंगलवार को पहुंची, जबकि सिंगापुर से डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन (DVI) टीम तैनात करने को लेकर समन्वय जारी है।

नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से LiDAR तकनीक, बेली ब्रिज, फ्रीजर, DNA जांच किट, लोड कैरियर, मानव अवशेष बैग, उच्च क्षमता वाले ड्रोन और जीन सीक्वेंसर समेत कई विशेष उपकरणों की आधिकारिक मांग की है।

DNA सैंपल के बाद अस्थायी दफन

कठिन परिस्थितियों में बरामद अवशेषों की पहचान के संबंध में क्षेत्री ने बताया कि जिन शवों की तत्काल पहचान संभव नहीं है या जिन्हें सुरक्षित रखना संभव नहीं है, उन्हें आवश्यक फॉरेंसिक प्रक्रिया पूरी करने और DNA नमूने लेने के बाद अस्थायी रूप से दफन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य बाद में पहचान सुनिश्चित करना है, ताकि पहचान होने के बाद परिवारों को अपने प्रियजनों के पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए सौंपे जा सकें।

लापता लोगों के परिवारों को काठमांडू के महाराजगंज स्थित नेपाल पुलिस अस्पताल या अपने निकटतम जिला पुलिस कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई है। विदेश में रहने वाले परिजन अपने देश में DNA प्रोफाइल तैयार कर उसे नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पर भेज सकते हैं।

कई देशों से मिल रही मदद

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत, चीन, जापान, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण कोरिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का समय पर राहत सामग्री और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए आभार जताया।

प्रधानमंत्री बालेन शाह राहत एवं बचाव अभियानों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने हाल में जापान के प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत भी की। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने जापान, कतर, सिंगापुर और मलेशिया के अपने समकक्षों से बातचीत की है, जबकि कनाडा के साथ बातचीत मंगलवार को प्रस्तावित है।

नुकसान का व्यापक आकलन जारी

नेपाल में मकानों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को हुए नुकसान का आकलन जारी है। सरकार ने कहा है कि पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) के जरिए आपदा से हुए कुल नुकसान और पुनर्वास की जरूरतों का व्यापक आकलन किया जाएगा।

लोक बहादुर क्षेत्री ने कहा कि तबाही का पैमाना देखते हुए नेपाल को पुनर्वास और पुनर्निर्माण के चरण में बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय सहायता की आवश्यकता होगी।

मंत्रालय ने लोगों और मीडिया से अपील की है कि वे आपदा से जुड़ी जानकारी के लिए केवल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA), नेपाल पुलिस और नेपाल पर्यटन बोर्ड के आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करें।

नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि रसुवा बाढ़ में लापता लोगों की पहचान के लिए उनके परिजनों से नेपाल पुलिस अस्पताल में DNA जांच के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें:  सऊदी के क्राउन प्रिंस सलमान को चाहिए कर्ज! 8 अरब डॉलर की अचानक पड़ी जरूरत.......क्या हैं असली वजह?