international news: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 6 अक्टूबर 2026 मंगलवार को अपने 5 दिवसीय तीन-देशीय दौरे पर निकल चुके हैं। बीते दिन एस जयशंकर अफ्रीकी दौरे के पहले चरण के तहत घाना की राजधानी अकरा पहुंचे। घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुद्ज़ेटो अबलाकवा ने अकरा पहुंचने पर एस. जयशंकर का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने भारत-घाना व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर बातचीत की।
इसके साथ ही उन्होंने घाना के विदेश मंत्री सैमुअर ओकुद्जेटो अबलाकवा और अन्य शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास पर चर्चा की। उन्होंने वैश्विक मंच पर आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, वैश्विक दक्षिण के औद्योगीकरण के अधिकार और रणनीतिक स्वायत्तता का आह्वान किया। बता दें कि विदेश मंत्री 5 दिवसीय दौरे के अंतर्गत घाना, कोटे डी आइवर और इथियोपिया जाएंगे।
एस जय शंकर ने एक्स पर किया पोस्ट
घाना पहुंचे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की एकजुटता, ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त समेत आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन लाने पर जोर दिया। इसके जरिए भारत-अफ्रीका साझेदारी को गति मिलेगी। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के रणनीतिक स्वायत्तता के विदेश नीति दृष्टिकोण की रूपरेखा पेश करते समय वैश्विक दक्षिण के औद्योगीकरण पर जोर दिया।
एस जयशंकर ने सोशल मीडिया अकॉउंट एक्स पर पोस्ट कर जानकारी साझा की। एस जयशंकर ने पोस्ट में लिखा, आज के अशांत समय में कूटनीति और प्रतिस्पर्धा को टकराव में बदलने के बजाय उसका प्रबंधन कर अपने फायदे के लिए सहयोग में बढ़ावा देने पर है।
आत्मनिर्भर भारत की बताई कहानी
भारत के आर्थिक बदलाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने देश की महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास पर बात की। उन्होंने अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र, विनिर्माण, उद्यमिता और आकांक्षाओं में हो रहे विकास की ओर भी इशारा किया। भारत को वैश्विक विकास का एक महत्वपूर्ण इंजन बनाने की बात भी कही।
विदेश मंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा को आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, तकनीकी क्षमताओं और आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन की क्षमता से जोड़ा। भारत प्रमुख क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को महत्व देता है। एस जयशंकर ने कहा कि भारत कई क्षेत्रों में अन्य देशों की मदद करता है। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की महत्वाकांक्षा, क्रियान्वयन और आत्मनिर्भर भारत की कहानी सुनाई।
भारत देता है प्रमुख क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का महत्व
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि कैसे अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, डिजिटल, विनिर्माण, उद्यमिता और आकांक्षाओं में हो रहे परिवर्तन भारत को वैश्विक विकास का महत्वपूर्ण इंजन बना रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, तकनीकी क्षमताओं और आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन की क्षमता से जुड़ी है।
भारत प्रमुख क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को महत्व देता है, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है। जयशंकर ने अवसरों के लोकतंत्रीकरण में सुलभ डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका पर प्रकाश डाला। एस जयशंकर ने अफ्रीकी भागीदारों के साथ भारत के अनुभव साझा करने की बात कही।
देश के युवाओं की भी विदेश में सराहना
उन्होंने भारत और अफ्रीका के लिए अपनी युवा आबादी को उत्पादक, कुशल और सशक्त नागरिकों में परिवर्तित करने के महत्व पर भी जोर दिया। साथ ही भारत की बढ़ती वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं और प्रौद्योगिकी के लाभों को व्यापक रूप से साझा करने की आवश्यकता बताई।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर उन्होंने ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त के लिए लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता पर जोर देने की बात कही। इसके साथ ही साथ ग्लोबल साउथ के औद्योगीकरण के अधिकार पर भी बल दिया। जयशंकर ने भारत के विदेश नीति को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता से प्रेरित होने की बात कही।
अफ्रीकी संघ को जी20 में शामिल करने का किया जिक्र
ईंधन, खाद्य पदार्थ, उर्वरक और वित्त सहित आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को एस जयशंकर ने अनिवार्य बताया है। वैश्विक दक्षिण के औद्योगीकरण का अधिकार भी काफी महत्वपूर्ण माना है। हमारी विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता से प्रेरित है। हमारा मानना है कि साझेदारी से हमारे विकल्प बढ़ने चाहिए, न कि सीमित होने चाहिए। विदेश मंत्री ने वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और उदाहरण के तौर पर भारत की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को जी20 में शामिल किए जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे सुधारित वैश्विक व्यवस्था की परिकल्पना करता है जो अफ्रीका और वैश्विक दक्षिण के विकास, प्रगति और समृद्धि का समर्थन करती हो।
हम अफ्रीका को अपने दिल में रखते हैं
जयशंकर ने व्यापार, अवसंरचना, क्षमता विकास, मानवीय सहायता और आपदा राहत, कृषि, स्वास्थ्य और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी को मजबूत करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि अधिक क्षमताओं वाला भारत एक अधिक गंभीर और प्रभावी भागीदार है।
हम अफ्रीका को अपने दिल में रखते हैं और न केवल आज के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी साझेदारी का निर्माण करेंगे। यह संबोधन जयशंकर की 6 से 10 अक्टूबर तक घाना , कोटे डी आइवर और इथियोपिया की तीन देशों की आधिकारिक यात्रा के दौरान दिया जिसका पहला चरण घाना है।
व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास और ग्लोबल साउथ एकजुट करना मुख्य उपद्देश्य
तीन देशों की इस यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और तीनों देशों के नेतृत्व से मिलकर मित्रता और सहयोग के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान व्यापार और आर्थिक संबंध, विकास सहयोग, क्षमता निर्माण और जन-संबंधों के साथ-साथ पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।
अदीस अबाबा में जयशंकर क्षेत्रीय मिशन प्रमुखों के सम्मेलन की अध्यक्षता भी करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह दौरा अफ्रीका के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करने और वैश्विक दक्षिण के साथ एकजुटता भागीदारी को आगे बढ़ाने में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाया है।
बहुत प्रसन्नता हुई
कार्यक्रम को लेकर एस जयशंकर ने अपने X पर पोस्ट कर लिखा- भारतीय समुदाय के सदस्यों और भारत के मित्रों के साथ भी बातचीत की। अकरा में कार्यक्रम को लेकर एस जयशंकर ने अपने X पर पोस्ट कर लिखा- भारतीय समुदाय के सदस्यों और भारत के मित्रों के साथ भी बातचीत की। अकरा में भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत करके काफी खुशी हुई। घाना में भारत को एक मित्र और विश्वसनीय प्रभावी साझेदार मिला है। साथ ही, एक महत्वपूर्ण साझेदार के साथ हमारे विशेष संबंधों को और मजबूत करने में समुदाय के योगदान की सराहना की।
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