brics : मिडिल ईस्ट संकट के बीच BRICS में भारत की कूटनीतिक परीक्षा होने वाली है। ऐसे में BRICS के सदस्य ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अलग-अलग रुख अपनाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बीच भारत की संगठनात्मक और आंतरिक संवाद का आपसी समन्वय कायम रखने के लिए आपसी सहमति को प्राथमिकता माना है। विदेश मंत्रायल द्वारा मिली जानाकरी के मुताबिक BRICS सहमति के आधार पर काम करता है। भारत कोशिश कर रहा है कि सभी सदस्य देशों के साथ बाचीत साझा हो जिससे आपसी सहमति भी कायम रहे।

MEA सूत्रों की माने तो BRICS में शामिल देश अपने राष्ट्रीय हितों के साथ-साथ अपना पक्ष रखने का अधिकारी है। ईरान और UAE की तरफ से भी संकट के मद्देनजर अपना नजरिया पेश किया। ऐसे में भारत का दायित्व है कि वह BRICS से जुड़े सभी संगठनों को अपनी बात रखने का अवसर दे। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि, BRICS में व्यापक तौर पर बातचीत,संवाद और शांति से अपना पक्ष रखा जाएगा। भारत भी तनाव के बीत संकट को लेकर समाधान निकालते हुए बातचीत के साथ कूटनीति का रास्ता अपनाने पर विचार कर सकता है।

BRICS सम्मेलन के समय प्रस्तावित संयुक्त बयान को लेकर सदस्य देशों के बीच आपसी बातचीत लगातार जारी है। MEA ने जानकारी देते हुए बताया कि, भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान सभी सदस्य देशों से बात करेगा। साथ ही आपसी सहमति बनाने का भी प्रयास किया जाएगा। BRICS के मंच की बात कि जाए तो अभी तक अन्य सदस्य देशों की तरफ से संकट को समाप्त करने के साथ-साथ तनाव की स्थिति को कम करने पर जोर दिया है। ऐसे में संयुक्त बयान में भी आपसी तालमेल बैठाने के लिए सदस्य देशों के बीच प्रयास किए जाएंगे।

भारत के लिए खास है ब्रिक्स

12-13 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता करने वाला है। इस शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य और अन्य सहयोगी देशों के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ आउटरीच को लेकर आमंत्रित किए गए नेता भी शामिल होंगे। भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पूर्व साल 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता की जाएगी। इससे पहले भारत 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। साल 2026 भारत के लिए वैसे भी महत्वपूर्ण पड़ाव है क्योंकि इस साल ब्रिक्स के बीस साल पूरे हो रहे है।