Delhi: इंडोनेशिया में एक बार फिर धरती के भीतर की हलचल ने लोगों को डरा दिया है। Anak Krakatau ज्वालामुखी में जोरदार विस्फोट के बाद आसमान में राख और गर्म गैसों का विशाल गुबार दिखाई दिया। ज्वालामुखी से निकली राख करीब 50 हजार फीट यानी लगभग 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
विस्फोट का असर इतना ज्यादा हुआ कि आसपास के हवाई क्षेत्र में उड़ानों पर भी असर पड़ा। कई उड़ानों को रद्द या दूसरे रास्तों पर भेजना पड़ा, जबकि यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। ज्वालामुखी से निकलने वाली राख विमानों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, इसलिए विमानन प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए कदम उठाए।
‘क्राकाटोआ का बच्चा’ फिर क्यों चर्चा में?
Anak Krakatau को ‘क्राकाटोआ का बच्चा’ कहा जाता है। यह इंडोनेशिया के सुंडा स्ट्रेट में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है। इसकी गतिविधियों पर वैज्ञानिक लगातार नजर रखते हैं, क्योंकि यह इलाका दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्रों में शामिल है। रविवार तड़के ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ और देखते ही देखते राख का गुबार आसमान में फैल गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक राख अलग-अलग दिशाओं में फैली और कुछ हिस्सों में काफी ऊंचाई तक पहुंची।
50 हजार फीट ऊपर तक पहुंची राख क्यों खतरनाक?
ज्वालामुखी से निकलने वाली राख सिर्फ जमीन पर गिरने वाली धूल नहीं होती। इसमें बेहद महीन कण, चट्टानी पदार्थ और खनिज होते हैं। जब ऐसी राख विमान की ऊंचाई तक पहुंचती है तो यह विमान के इंजन के लिए खतरनाक हो सकती है। राख इंजन के गर्म हिस्सों में जाकर पिघल सकती है और बाद में जमकर इंजन के संचालन को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि ज्वालामुखी के आसपास राख का गुबार दिखाई देने पर विमानन कंपनियां उड़ानों को रोकने या उनका मार्ग बदलने का फैसला करती हैं।
सैकड़ों उड़ानों पर पड़ा असर
ज्वालामुखी की राख के कारण इंडोनेशिया के हवाई यातायात पर बड़ा असर पड़ा। जकार्ता के Soekarno-Hatta International Airport समेत कई जगहों पर उड़ान संचालन प्रभावित हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक 200 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुईं और बड़ी संख्या में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।हालांकि, उड़ानों के रद्द होने, डायवर्ट होने और देरी से चलने के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं। इसलिए आधिकारिक अंतिम आंकड़ा आने तक प्रभावित उड़ानों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आ सकती हैं।
2018 में इसी ज्वालामुखी ने मचाई थी सुनामी
Anak Krakatau का इतिहास बेहद खतरनाक रहा है। दिसंबर 2018 में ज्वालामुखी के एक हिस्से के ढहने के बाद समुद्र में सुनामी पैदा हुई थी। इस सुनामी ने इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी और हजारों लोग प्रभावित हुए थे। यही वजह है कि जब भी Anak Krakatau में बड़ी गतिविधि होती है, वैज्ञानिक और प्रशासन समुद्र और आसपास के तटीय इलाकों पर भी विशेष नजर रखते हैं।
क्या इस बार भी आएगी सुनामी?
2018 की घटना के कारण मौजूदा विस्फोट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या फिर से सुनामी का खतरा है। फिलहाल इस बार किसी सुनामी की चेतावनी की पुष्टि नहीं हुई है। ज्वालामुखी की गतिविधियों और समुद्री हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों के लिए सबसे अहम बात यह देखना है कि ज्वालामुखी की गतिविधि आगे बढ़ती है या धीरे-धीरे शांत हो जाती है।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
ज्वालामुखीय राख जहां गिरती है, वहां लोगों को सांस और आंखों से जुड़ी परेशानी हो सकती है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जा सकती है। फिलहाल सबसे ज्यादा असर हवाई यातायात पर दिखाई दे रहा है। एयरलाइंस यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति जांचने और एयरपोर्ट जाने से पहले अपडेट लेने की सलाह दे रही हैं।
फिर क्यों डराने लगा Anak Krakatau?
Anak Krakatau का हर बड़ा विस्फोट इसलिए चर्चा में आ जाता है क्योंकि इसके पीछे इतिहास की एक खौफनाक घटना जुड़ी हुई है। 1883 के मूल Krakatoa विस्फोट और बाद में 2018 की सुनामी ने इस ज्वालामुखीय क्षेत्र को दुनिया के सबसे खतरनाक प्राकृतिक क्षेत्रों में शामिल कर दिया। हालांकि मौजूदा घटना को 2018 जैसी सुनामी से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिक लगातार ज्वालामुखी की गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।
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