मुंबई: महाराष्ट्र के सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क को नई रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) राज्य में तीन नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की योजना पर काम कर रहा है। खास बात यह है कि इन परियोजनाओं में वेस्टर्न घाट की दुर्गम पहाड़ियों के नीचे से सुरंगों के जरिए सड़क निकालने की योजना है। इससे कोंकण क्षेत्र और प्रमुख बंदरगाहों तक पहुंचने में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है। इन तीनों परियोजनाओं की DPR तैयार करने के लिए NHAI ने बिड आमंत्रित की हैं। DPR के आधार पर ही एक्सप्रेसवे का अंतिम रूट, सुरंगों की लंबाई, जमीन अधिग्रहण और लागत समेत अन्य तकनीकी पहलुओं पर अंतिम फैसला होगा।

तीन एक्सप्रेसवे पर शुरू हुई प्रक्रिया
NHAI के मास्टरप्लान में शामिल तीन प्रमुख परियोजनाएं हैं।
जयगढ़ पोर्ट-चिपलून-सतारा एक्सप्रेसवे- DPR खोलने की तारीख 15 सितंबर 2026
दिघी पोर्ट-पोलादपुर-सुरूर एक्सप्रेसवे- DPR खोलने की तारीख 15 सितंबर 2026
नया मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे- DPR खोलने की तारीख 1 अक्टूबर 2026
DPR कंसल्टेंट की नियुक्ति के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए करीब एक साल का समय निर्धारित किया गया है।

क्या होता है ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे?
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का मतलब ऐसी सड़क से है, जिसे मौजूदा सड़क को चौड़ा करने के बजाय बिल्कुल नए अलाइनमेंट पर तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य बेहतर डिजाइन, अधिक गति, सुरक्षा और कम यात्रा समय सुनिश्चित करना होता है। वहीं, DPR किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का तकनीकी ब्लूप्रिंट होती है। इसमें सड़क का संभावित अलाइनमेंट, मिट्टी की जांच, सुरंगों की डिजाइन, जमीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय पहलुओं और अनुमानित लागत जैसी जानकारियों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

वेस्टर्न घाट की चुनौती होगी आसान
महाराष्ट्र के मैदानी और शहरी इलाकों से कोंकण तट तक पहुंचने में वेस्टर्न घाट की पहाड़ियां बड़ी भौगोलिक चुनौती हैं। घुमावदार और संकरी सड़कों के कारण यात्रा लंबी हो जाती है। मानसून के दौरान भूस्खलन जैसी समस्याएं भी सफर को प्रभावित करती हैं। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे में सुरंगों का इस्तेमाल होने से पहाड़ियों को ऊपर से पार करने के बजाय उनके नीचे से गुजरने का विकल्प मिलेगा। इससे दूरी और घाट पार करने में लगने वाले समय को कम करने में मदद मिल सकती है।

बंदरगाहों तक माल पहुंचाना होगा आसान
इन परियोजनाओं का असर केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। जयगढ़ और दिघी पोर्ट को सतारा, सुरूर, चिपलून और आसपास के औद्योगिक एवं कृषि क्षेत्रों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। तेज सड़क संपर्क से भारी वाहनों के लिए बंदरगाहों तक माल पहुंचाना आसान होगा। इससे लॉजिस्टिक्स का समय और लागत कम करने तथा महाराष्ट्र के आयात-निर्यात कारोबार को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। वहीं, नया मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे मुंबई और पुणे के बीच मौजूदा सड़क नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए एक अतिरिक्त तेज और सुरक्षित कनेक्टिविटी विकल्प उपलब्ध करा सकता है।

अभी फाइनल नहीं है एक्सप्रेसवे का रूट
हालांकि, प्रस्तावित रूट और नक्शे को लेकर अभी अंतिम तस्वीर साफ नहीं है। कौन से गांवों से सड़क गुजरेगी, सुरंगों की वास्तविक लंबाई कितनी होगी और एक्सप्रेसवे का अंतिम अलाइनमेंट क्या होगा, इसका फैसला विस्तृत DPR तैयार होने के बाद ही किया जाएगा। अगर ये परियोजनाएं योजना के मुताबिक आगे बढ़ती हैं, तो वेस्टर्न घाट की प्राकृतिक भौगोलिक बाधाओं को पार करते हुए कोंकण, बंदरगाहों और महाराष्ट्र के प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी का नया नेटवर्क तैयार हो सकता है।