Sambhal : अक्सर अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले कांग्रेस के पूर्व नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद पर तंज कसा है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने चुनाव आयोग की आलोचना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के अंदर समीक्षा करने का आह्वान किया है। कृष्णम की यह टिप्पणी समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध मार्च और आंदोलने को लेकर की गई है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त को चोर करार देने से पहले इन सांसदों को अपने-अपने पदों से इस्तीफा देने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार चोर हैं, गलत हैं, बेईमान हैं, तो अवधेश प्रसाद सांसद कैसे बने? वे लोकसभा के सदस्य कैसे बने?

विपक्ष की हार का कारण सनातन धर्म की राजनीति

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सासंद अवधेश प्रसाद के खिलाफ आलोचनात्मक रवैया अपनाते हुए कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार थे तो अवधेश प्रसाद चुनाव कैसे जीत गए। ऐसी स्थिति में तो उन्हें चुनाव में हार जाना था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव इसलिए नहीं हार रहा है क्योंकि ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। बल्कि विपक्ष की हार का मुख्य कारण देश के खिलाफ राजनीति चाल चलना, सनातन धर्म के खिलाफ राजनीति करना है। आपने राहुल गांधी जैसे गैर-गंभीर और अपरिपक्व नेता को विपक्ष का नेता बना दिया है।

राजनीति में पाखंडियों के लिए नहीं है कोई स्थान

विपक्षी पार्टी के पास ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की स्वतंत्रता है। लेकिन अगर वे चुनाव आयोग को बेईमान मानते हैं तो उन्हें पहले अपनी लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे देना चाहिए। क्योंकि चुनाव आयोग को बेईमान या चोर कहने से आप लोकसभा सदस्य नहीं रह सकते। भारत में इसे पाखंड कहा जाता है और देश की राजनीति में पाखंडियों के लिए कोई स्थान नहीं है।

लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों की ओवैसी नहीं करेंगे चर्चा

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने काल्पनिक 50-50 जनसंख्या विभाजन का भी जिक्र किया। इसे लेकर उन्होंने कहा कि ओवैसी लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में बोलना बंद कर देंगे। मुहम्मद अली जिन्ना से जुड़ी भावनाओं को दोहराने लगेंगे। जिस दिन देश की आबादी 50-50 के अनुपात में बंट जाएगा। उस दिन ओवैसी लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों की चर्चा नहीं करेंगे। उस दिन वह केवल मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा व्यक्त किए विचारों को ही दोहराएंगे।

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