मुंबई: महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च निकाला। दोनों नेता समर्थकों के साथ BMC मुख्यालय की ओर बढ़े और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
विपक्षी दल लगातार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह मार्च मतदाताओं के अधिकार और लोकतंत्र पर हो रहे कथित हमले के विरोध में है। उन्होंने कहा कि हम आज यहां तानाशाह को हटाने के लिए खड़े हैं।” उद्धव ने दावा किया कि देशभर में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया।
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति कैसे हुई?
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाए जाने का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि आखिर ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त कैसे नियुक्त किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के जरिए इस्तेमाल की जा रही शक्तियां नागरिकों के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर रही हैं। उद्धव ने कहा कि नागरिकता से जुड़े अधिकारों पर फैसला लेने की शक्ति गृह मंत्रालय के पास है, लेकिन कथित तौर पर इसका इस्तेमाल चुनाव आयोग के जरिए किया जा रहा है।
उद्धव ने बीजेपी पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले इंडिया अगेंस्ट करप्शन था, अब इंडिया अगेंस्ट वोट चोर्स है। उन्होंने SIR के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान किए जाने को लेकर भी सवाल उठाया। उद्धव ने कहा कि केंद्र सरकार यह बताए कि SIR के दौरान कितने बांग्लादेशी पकड़े गए। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा केंद्र के जिम्मे है, ऐसे में अवैध तरीके से लोग देश में कैसे दाखिल हुए।
राज ठाकरे ने SIR रद्द करने की मांग की
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में कराए जा रहे पूरे SIR को रद्द करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन परिस्थितियों में मतदाता सूची के इस पुनरीक्षण की जरूरत पड़ी। राज ठाकरे ने दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान 40 से 60 लाख मतदाताओं के नाम जोड़े गए और अब SIR के जरिए करीब दो करोड़ लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर ये दो करोड़ मतदाता कौन हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से दिल्ली जाकर SIR रद्द करने की मांग करने की अपील की। राज ठाकरे ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को बंद कर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।
विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच जारी है विवाद
उद्धव और राज ठाकरे का यह संयुक्त मार्च SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच हुआ है। दोनों नेताओं ने 4 अक्टूबर के मार्च का ऐलान करते हुए अन्य राजनीतिक दलों से भी इसमें शामिल होने की अपील की थी।
विपक्षी दल मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और साफ करना है। आयोग के मुताबिक, प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए भी व्यवस्था मौजूद है।
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