Rahul Gandhi: इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत की। इस दौरान मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर अभ्यर्थियों ने अपनी समस्याएं सामने रखीं। राहुल गांधी ने कहा कि एक छात्र वह होता है जो सवाल पूछता है, जिज्ञासु रहता है और अपनी आवाज उठाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था ऐसे छात्रों से असहज महसूस करती है, क्योंकि वे व्यवस्था से सवाल करते हैं।
उन्होंने कहा कि सिस्टम छात्रों को नहीं चाहता, वह ‘अंधभक्त’ चाहता है।” राहुल गांधी ने ‘अंधभक्त’ और छात्र के बीच अंतर बताते हुए कहा कि छात्र सवाल पूछता है, जबकि उनके अनुसार अंधभक्त सवाल नहीं करता और अपने ही भ्रम की दुनिया में रहता है।
पेपर लीक क्यों हो रहे हैं?
राहुल गांधी ने परीक्षा व्यवस्था, संस्थानों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाते हुए कहा कि छात्र यह पूछता है कि स्कूल-कॉलेजों की स्थिति ऐसी क्यों है, बुनियादी ढांचा कमजोर क्यों है और पेपर लीक क्यों हो रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग और न्यायपालिका समेत विभिन्न संस्थानों के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने परीक्षाओं में पारदर्शिता, भर्ती में देरी और रिक्त पदों से जुड़ी समस्याएं राहुल गांधी के सामने रखीं।
8 साल से भर्ती का इंतजार, अभ्यर्थी ने बताई परेशानी
एक MPPSC अभ्यर्थी ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में पिछले करीब आठ वर्षों से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित है। अभ्यर्थी के मुताबिक, विभिन्न परीक्षाओं में करीब 13 प्रतिशत पदों को रोककर रखा गया है, जिससे बड़ी संख्या में युवा अपनी उम्र निकलने के बावजूद नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
अभ्यर्थी ने आरोप लगाया कि कई रिक्त पदों पर भर्ती नहीं की जा रही है और कुछ पदों को संविदा के आधार पर भरा जा रहा है। उसने कहा कि अभ्यर्थी भर्ती शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन बाद में परिणाम रोक दिए जाते हैं।
आरक्षण से जुड़े मामलों पर भी उठे सवाल
राजगढ़ जिले की छात्रा सपना गुर्जर ने भी नियुक्तियों से जुड़े लंबित मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण से संबंधित विवादों के कारण करीब 10 हजार पद आठ वर्षों से लंबित हैं और हजारों अभ्यर्थी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कार्यक्रम में छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और लंबित नियुक्तियों को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं।