Telangana Radial Road-2 Tender Controversy: तेलंगाना में 3,296 करोड़ रुपये के रेडियल रोड-2 प्रोजेक्ट के टेंडर को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कांग्रेस सरकार पर टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सभी टेंडर रद्द करने, व्यापक जांच कराने और पूरी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को खुला पत्र लिखकर उठाए सवाल
KTR ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को लिखे खुले पत्र में ठेके आवंटित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कम कीमत की बोली लगाने वाले कुछ ठेकेदारों को अयोग्य घोषित किया गया, जबकि कथित तौर पर अनुमानित लागत से अधिक कीमत पर ठेके दिए गए। BRS नेता ने सरकार से सभी वित्तीय बोलियों, तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट, तुलनात्मक विवरण और ठेका आवंटन से जुड़े फैसलों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि इतने बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

क्या है 3,296 करोड़ रुपये का रेडियल रोड-2 प्रोजेक्ट?
रेडियल रोड-2 परियोजना के तहत बुडवेल स्थित आउटर रिंग रोड (ORR) से कोडंगल के पास NH-167N तक 81.15 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाना है। परियोजना को तीन पैकेज में बांटा गया है। KTR की ओर से साझा किए गए टेंडर विवरण के मुताबिक, पैकेज-1: NCC लिमिटेड को 1,286.03 करोड़ रुपये का ठेका दिए जाने की जानकारी है। आरोप है कि यह अनुमानित लागत से 3.95 प्रतिशत अधिक है। पैकेज-2: BVSR को ठेका दिए जाने का उल्लेख है। पैकेज-3: GKC को ठेका दिए जाने का उल्लेख है। KTR ने तीनों पैकेज की अनुमानित लागत, कंपनियों की ओर से लगाई गई बोलियों और अंतिम ठेका राशि का पूरा विवरण जारी करने की मांग की है।

पांच कार्यदिवस में 13 बोलियों के मूल्यांकन पर सवाल
KTR ने टेंडर प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर भी सवाल उठाए। उनके पत्र में दिए गए विवरण के अनुसार, बोली जमा करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी, जबकि तकनीकी मूल्यांकन, पात्रता की जांच, वित्तीय बोलियां खोलने और ठेके आवंटित करने की प्रक्रिया कथित तौर पर 8 अक्टूबर तक पूरी कर ली गई। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए आई 13 बोलियों का मूल्यांकन और पूरी प्रक्रिया लगभग पांच कार्यदिवस में कैसे पूरी कर ली गई।

BRS नेता ने तकनीकी पात्रता के मानकों को सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू किए जाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियों को तकनीकी आधार पर बाहर किया गया, जबकि पसंदीदा कंपनियों को ठेके दिए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।

600 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का भी उठाया मुद्दा
KTR ने Sushi Infra and Mining Limited की ओर से अदालत में रखे गए पक्ष का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, कंपनी ने तीनों पैकेज में अपनी अयोग्यता को लेकर आपत्ति जताई थी और इससे राज्य को करीब 600 करोड़ रुपये का संभावित वित्तीय नुकसान होने का दावा किया गया था। BRS नेता ने इस दावे की विस्तृत जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि कंपनियों की बोलियों, परियोजना की अनुमानित लागत और अंतिम ठेका राशि की तुलना करके यह पता लगाया जाना चाहिए कि सरकारी खजाने को वास्तव में कोई नुकसान हुआ है या नहीं। उन्होंने मांग की कि यदि जांच में अनियमितता या वित्तीय नुकसान साबित होता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

रेडियल रोड-1 के टेंडर पर भी उठाए सवाल
KTR ने रेडियल रोड-1 परियोजना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इसकी अनुमानित लागत करीब 591 करोड़ रुपये बताते हुए आरोप लगाया कि अंतिम ठेका राशि अनुमान से लगभग 15 प्रतिशत अधिक रही। उन्होंने रेडियल रोड-1 और रेडियल रोड-2, दोनों परियोजनाओं से जुड़े टेंडर रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और बोली लगाने से लेकर ठेका आवंटन तक की प्रक्रिया की समीक्षा कराने की मांग की।

KTR की सरकार से प्रमुख मांगें
1. 3,296 करोड़ रुपये के रेडियल रोड-2 टेंडर रद्द किए जाएं और व्यापक जांच कराई जाए।
2. तीनों पैकेज की अनुमानित लागत, वित्तीय बोलियां और अंतिम ठेका राशि सार्वजनिक की जाए।
3. तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट, तुलनात्मक विवरण और टेंडर मूल्यांकन समिति की बैठकों के कार्यवृत्त जारी किए जाएं।
4. करीब 600 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान के दावे की जांच कराई जाए।
5. पिछले तीन वर्षों में HMDA और HGCL की ओर से दिए गए 100 करोड़ रुपये से अधिक के ठेकों का विशेष CAG ऑडिट कराया जाए।
6. टेंडर प्रक्रिया, बोलीदाताओं की अयोग्यता और ठेका आवंटन पर श्वेत पत्र जारी किया जाए।
7. तकनीकी पात्रता के नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।

सरकार दस्तावेजों के साथ जवाब दे
KTR ने कहा कि सार्वजनिक धन से जुड़ी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर उठे सवालों से सरकार बच नहीं सकती। उनके मुताबिक, यदि आरोप निराधार हैं, तो सरकार को दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि अनियमितताएं या वित्तीय नुकसान साबित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, उपलब्ध विवरण KTR और BRS की ओर से लगाए गए आरोपों तथा उनकी मांगों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि के लिए सरकारी जवाब, आधिकारिक टेंडर रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।