Gurugram Metro Phase 2: गुरुग्राम में ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण के निर्माण को रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। मेट्रो रूट में बाधा बन रही पानी, सीवर, गैस पाइपलाइन और बिजली केबल जैसी उपयोगिताओं को शिफ्ट करने के लिए गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) ने करीब 62 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी किया है। इसका उद्देश्य मेट्रो निर्माण के दौरान आने वाली तकनीकी अड़चनों को पहले ही दूर करना है, ताकि परियोजना का काम शुरू होने के बाद देरी की आशंका कम हो सके।
62 करोड़ रुपये से हटेंगी निर्माण की बाधाएं
GMRL की ओर से जारी टेंडर के तहत चयनित कंपनी को मेट्रो रूट में बाधा बन रही पाइपलाइन और अन्य उपयोगिताओं को दूसरी जगह शिफ्ट करना होगा। इसके साथ ही जहां जरूरत होगी, वहां सड़क चौड़ी करने और निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी कंपनी को दी जाएगी। योजना के अनुसार, पानी और सीवर की लाइन, गैस पाइपलाइन, बरसाती नाले तथा बिजली केबल को स्थानांतरित किया जाएगा। इन कार्यों को नौ महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्माण के दौरान जाम की समस्या से बचने के लिए चयनित कंपनी को ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर डायवर्जन प्लान भी तैयार करना होगा। इससे मेट्रो निर्माण के साथ-साथ सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सुचारु बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
1662 करोड़ रुपये में बनेगा दूसरा चरण, 9 नवंबर को खुलेगा टेंडर
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण के निर्माण के लिए GMRL ने 5 अक्टूबर को करीब 15 किलोमीटर लंबे रूट का टेंडर जारी किया था। इस चरण के निर्माण पर लगभग 1,662 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, निर्माण संबंधी इस टेंडर को 9 नवंबर को खोला जाना है। टेंडर आवंटित होने के बाद चयनित कंपनी को 30 महीने के भीतर निर्माण पूरा करना होगा।
पाइपलाइन और दूसरी उपयोगिताओं को शिफ्ट करने के लिए अलग से टेंडर जारी करने का मकसद यह है कि मुख्य निर्माण कार्य के दौरान इन सुविधाओं को हटाने में समय न गंवाना पड़े। इससे परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दो किलोमीटर तक बनेगा डबल डेकर कॉरिडोर
दूसरे चरण की एक खास बात यह है कि करीब दो किलोमीटर के हिस्से में डबल डेकर संरचना विकसित करने की योजना है। इसमें फ्लाईओवर के ऊपर मेट्रो का संचालन होगा। प्रस्तावित योजना के मुताबिक, ओल्ड दिल्ली रोड पर सुशील ऐमा रोड से सेक्टर-21 की दिशा में करीब 1.2 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर बनाया जाएगा। वहीं, बजघेड़ा रोड पर करीब 800 मीटर लंबे फ्लाईओवर का प्रस्ताव है। इस तरह सड़क और मेट्रो के लिए अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था बनाने से व्यस्त मार्गों पर कनेक्टिविटी बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
दूसरे चरण में बनेंगे 14 मेट्रो स्टेशन
दूसरे चरण में कुल 14 स्टेशनों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें सेक्टर-7, सेक्टर-4, सेक्टर-5, रेलवे स्टेशन, अशोक विहार, सेक्टर-3, बजघेड़ा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर-23ए, सेक्टर-22, सेक्टर-21, उद्योग विहार फेज-1, डीएलएफ साइबर सिटी का नाम शामिल है। इन स्टेशनों के बनने से पुराने गुरुग्राम के रिहायशी क्षेत्रों, रेलवे स्टेशन और प्रमुख कारोबारी केंद्रों के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे रोजाना काम पर जाने वाले लोगों और दूसरे यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन का अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है।
पहले चरण की धीमी रफ्तार भी बनी चुनौती
जहां दूसरे चरण की तैयारियां तेज करने की कोशिश हो रही है, वहीं पहले चरण के निर्माण की गति चिंता का विषय बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले चरण का टेंडर पिछले साल अगस्त में आवंटित हुआ था। एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी निर्माण करीब 30 प्रतिशत ही पूरा हुआ था। हीरो होंडा चौक से द्वारका एक्सप्रेसवे स्थित सेक्टर-101 तक निर्माण की प्रगति सीमित बताई गई है। इस चरण को दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
ऐसे में दूसरे चरण के लिए पहले से पाइपलाइन शिफ्टिंग और यातायात प्रबंधन की तैयारी करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नई समयसीमा और वास्तविक प्रगति का आकलन आगे होने वाले काम के आधार पर ही किया जा सकेगा।
गुरुग्राम के लोगों को क्या होगा फायदा?
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो का दूसरा चरण पूरा होने पर शहर के कई रिहायशी इलाकों, रेलवे स्टेशन और उद्योग व आईटी क्षेत्र के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है। मेट्रो से सड़क यातायात पर निर्भरता कम करने और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को सुविधाजनक विकल्प देने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, 62 करोड़ रुपये का टेंडर परियोजना के रास्ते में आने वाली बुनियादी अड़चनों को दूर करने की दिशा में एक अहम कदम है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि उपयोगिताओं की शिफ्टिंग और मुख्य निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के मुताबिक आगे बढ़ते हैं या नहीं।