Bhopal Indore Greenfield Expressway: मध्य प्रदेश के दो बड़े शहरों भोपाल और इंदौर के बीच तेज, सुरक्षित और सुगम कनेक्टिविटी की राह अब साफ होती दिख रही है। केंद्र सरकार ने करीब 161 किलोमीटर लंबे भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट को मंजूरी दे दी है। करीब 4,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह एक्सेस-कंट्रोल 6 लेन कॉरिडोर दोनों शहरों के बीच सफर को काफी आसान बनाने वाला है।
मौजूदा सड़क से अलग नए रूट पर बनेगा एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे को मौजूदा भोपाल-इंदौर मार्ग से अलग नए अलाइनमेंट पर विकसित किया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से इसके अलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना की अगली प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। परियोजना की अंतिम लागत फिलहाल तय नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले करीब पांच महीनों में इसकी वास्तविक लागत स्पष्ट हो सकती है।
दो घंटे से भी कम में पूरा होगा भोपाल-इंदौर का सफर
एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड और एक्सेस-कंट्रोल व्यवस्था होगी। इसके बनने के बाद भोपाल से इंदौर के बीच यात्रा का समय दो घंटे से भी कम होने का अनुमान है। यातायात को निर्बाध बनाए रखने के लिए पूरे कॉरिडोर पर केवल 2 से 3 प्रमुख एंट्री-एग्जिट पॉइंट रखने की योजना है। इससे बार-बार रुकने और ट्रैफिक में फंसने की समस्या कम होगी और वाहन लगातार रफ्तार से चल सकेंगे। भोपाल की ओर से एक्सप्रेसवे तक पहुंच कोलार या वेस्टर्न कॉरिडोर के रास्ते मिलने की संभावना है।
अगले 10 महीने में शुरू हो सकता है निर्माण कार्य
अलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभाग जमीन से जुड़ी तैयारियों और परियोजना की अगली औपचारिकताओं पर काम करेंगे। अनुमान है कि अगले करीब 10 महीनों में जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।
व्यापार और विकास को मिलेगी नई रफ्तार
भोपाल और इंदौर के बीच यह हाई-स्पीड कॉरिडोर सिर्फ यात्रियों के लिए ही अहम नहीं होगा, बल्कि दोनों शहरों के बीच व्यापार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। तेज कनेक्टिविटी से माल ढुलाई का समय कम होगा और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
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