AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के SIR संचालन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए और मतदाता डेटाबेस और हटाए गए नामों की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। विपक्ष द्वारा दायर की गई याचिका में मतदाता डेटाबेस और हटाए गए नामों की स्वतंत्र ऑडिट की मांग की गई। संशोधन प्रक्रिया के साथ-साथ मतदाता सूचियों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में तकनीकी जांच के मुद्दे को उठाया है। विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक समिति के गठन की मांग की है।

राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका में दिया तर्क

इससे पहले याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बगैर चुनाव आयोग की सामूहिक शक्तियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। उन्होंने राष्ट्रव्यापी एसआईआर कराने के फैसले को लेकर फाइलें, कार्यवृत्त, टिप्पणियां और आपत्तियां समेत सभी रिकॉर्ड मांगे हैं। राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया है। चुनाव आयोग को एक बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय के तौर पर कार्य करना चाहिए। मतदाता सूची से संबंधित निर्णय संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 के अनुरूप होने चाहिए।

पड़ सकता है अतिरिक्त बोझ

याचिका में ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन फॉर्म 6 में किए गए संशोधन पर भी चिंता जाहिर की है। इसमें आवेदकों और उनके रिश्तेदारों की पहले की SIR मतदाता सूची में उपस्थिति के संबंध में घोषणा को शामिल किया। याचिका में तर्क दिया है कि बैगर संशोधन के नियम लागू किए गए है। इसमें पात्र मतदाताओं, विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। ECINET और ERONET डेटाबेस का एक स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने, हटाए गए मतदाताओं का बूथ-वार विवरण और प्रत्येक को हटाने के कारणों का प्रकाशन करने के साथ सुरक्षा उपायों की मांग की सुनिश्चित करने की बात कही। किसी भी पात्र मतदाता को बिना सूचना और सुनवाई का उचित अवसर दिए बगैर हटाया न जाए।

मतभेद विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा थे

याचिका में नाम हटाने की मांग करते हुए बड़ी संख्या में फॉर्म 7 आपत्तियां दाखिल करने और कुछ विशेष समुदायों और महिलाओं को निशाना बनाए जाने की आशंका भी जताई गई है। इन आरोपों पर अभी फैसला होना बाकी है। याचिका में चुनाव आयोग के उस जवाब को स्वीकार किया गया है जिसमें कहा गया है कि आयुक्तों के बीच मतभेद विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा थे और उनके निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। इसमें आधिकारिक अभिलेखों की जांच की मांग की गई है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि निर्णय कानून के अनुसार लिए गए थे या नहीं।

एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल बंद करने की भी मांग

ओवैसी ने एसआईआर प्रक्रिया के संचालन की बार-बार आलोचना की है । उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को निरस्त करने की भी मांग की है, उनका तर्क है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों को दी गई कानूनी छूट चुनाव निकाय की विश्वसनीयता को कमजोर करती है। ओवैसी ने मतदाताओं पर लगाई गई अतिरिक्त आवश्यकताओं के आधार पर सवाल उठाते हुए एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल बंद करने की भी मांग की ।

विरोध करने के अधिकार का बचाव करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं कहा है कि विरोध करना एक मौलिक अधिकार है। लोग विरोध करेंगे, और उन्हें विरोध करना चाहिए। अगर आप दिल्ली को बंद कर देंगे, तो क्या आप लोगों के दिमाग को बंद कर पाएंगे? आप नहीं कर सकते। पूरी स्थिति को पूरी तरह से गलत तरीके से संभाला गया है।

सीजेपी के 3 कार्यकर्ताओं को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

इसी बीच, एसआईआर विवाद दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों के साथ मेल खा रहा है, जहां पुलिस ने 13 अक्टूबर को तीन कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर निरस्त किए गए जंतर-मंतर विरोध स्थल में प्रवेश करने और पुलिस कर्मियों को बाधा पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, दो कार्यकर्ताओं, सौरभ दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि अजिंक्या शिंदे को शांति और अच्छे व्यवहार को बनाए रखने के लिए छह महीने के लिए जमानत पर रिहा कर दिया गया।


पुलिस ने कहा कि कार्यकर्ताओं द्वारा बार-बार सार्वजनिक शांति भंग करने, कानून का उल्लंघन करने और सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरों को उकसाने के कथित प्रयासों के मद्देनजर यह कार्रवाई की गई है। कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधियों ने इस कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं। ये घटनाक्रम एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा जारी आंदोलन के बीच सामने आए हैं ।

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