IAS Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम हरिभाऊ मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 25 मई 2026 को महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर का पद संभालने के बाद उन्होंने मिलावटखोरों और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की। करीब दो महीनों में राज्यभर में 1,100 से अधिक निरीक्षण किए गए और लगभग 50 करोड़ रुपये का खाद्य भंडार जब्त किया गया। इसमें कथित तौर पर 1.6 लाख लीटर मिलावटी दूध भी शामिल था।
FDA कमिश्नर बनते ही सख्त कार्रवाई
मुंढे के कार्यकाल में 56 रेस्तरां के लाइसेंस निलंबित किए गए। संगठित गुटखा नेटवर्क के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई की गई। उन्होंने पेप्सिको, रेड बुल और स्टिंग जैसी कंपनियों को अपने पेय पदार्थों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ लिखने को लेकर भी चेतावनी दी थी। कंपनियों ने बाद में आदेश का पालन करने की बात कही।
मुंढे का कहना है कि जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान के प्रति प्रशासन नरमी नहीं बरतेगा। उनका कार्यालय आम लोगों के लिए भी खुला रहता है और प्रत्येक कार्यदिवस शाम 4 से 5 बजे तक लोग उनसे मुलाकात कर सकते हैं।
किसान परिवार से UPSC तक का सफर
तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताड़सोना गांव में एक किसान परिवार में हुआ। उनकी शुरुआती शिक्षा जिला परिषद स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने औरंगाबाद से उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने इतिहास में बीए और राजनीति विज्ञान में एमए किया।
मुंढे ने 2004 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की। इसके बाद वह 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी बने। अगस्त 2005 में सोलापुर में प्रशिक्षु उप-कलेक्टर के रूप में उनकी पहली पोस्टिंग हुई।
21 साल में 25 बार तबादला
तुकाराम मुंढे के प्रशासनिक करियर की सबसे चर्चित बात उनका तबादला रिकॉर्ड है। करीब 21 साल की सेवा में उनका 25वीं बार ट्रांसफर हुआ है। इसी वजह से उनकी तुलना अक्सर हरियाणा कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका से की जाती है। मुंढे ने डिप्टी कलेक्टर, जिला कलेक्टर, नगर आयुक्त और सचिव समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। सोलापुर, नांदेड़, वाशिम, जालना, नवी मुंबई, नासिक, नागपुर और पुणे समेत कई शहरों में उनकी पोस्टिंग रही है। 2018 और 2023 में उनका तीन-तीन बार तबादला हुआ, जबकि 2009, 2020 और अगस्त 2026 तक कुछ वर्षों में दो-दो बार ट्रांसफर हुआ।
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सख्त छवि के कारण रहते हैं चर्चा में
तुकाराम मुंढे अपनी स्पष्ट कार्यशैली, नियमों के कड़ाई से पालन और भ्रष्टाचार या अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पहचाने जाते हैं। रेत माफिया और मिलावटखोरों के खिलाफ उनके अभियानों ने उन्हें खास पहचान दिलाई है। उन्हें ‘मैन ऑफ ए मिशन’ के तौर पर भी जाना जाता है और वह सर्वश्रेष्ठ कलेक्टर का पुरस्कार हासिल कर चुके हैं।
लगातार तबादलों के बावजूद मुंढे की प्रशासनिक छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी हुई है, जो नियमों के पालन और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि उनकी हर नई पोस्टिंग और कार्रवाई महाराष्ट्र की प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन जाती है।