अंधेरी रात में अगर बालकनी में टंगी किसी चीज़ से अचानक खनखनाहट की आवाज़ आए, तो अक्सर डर लगना स्वाभाविक है। लेकिन डेनवर में रहने वाली 43 वर्षीय एरिन मेरेली के लिए यही आवाज़ सुकून लेकर आती है। इसकी वजह है उनकी बहन की एक अनोखी आखिरी इच्छा, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती।
मरने से पहले कही थी ये बात
मरने से पहले उनकी बहन ने कहा था कि उसे पारंपरिक तरीके से दफनाया या जलाया न जाए, बल्कि उसकी याद में एक नीली विंड चाइम बनाई जाए। एरिन ने इस इच्छा को सच कर दिखाया। उन्होंने अपनी बहन के अवशेषों से एक खास विंड चाइम बनवाई और उसे अपनी बालकनी में टांग दिया। अब जब हवा चलती है और वह चाइम बजती है, तो एरिन को अपनी बहन की मौजूदगी महसूस होती है।
बहन ने की थी जल दाह संस्कार
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे ‘अल्कलाइन हाइड्रोलिसिस’ नाम की तकनीक है, जिसे ‘जल दाह संस्कार’ भी कहा जाता है। इसमें शरीर को पानी और विशेष रसायनों के साथ रखा जाता है, जिससे शरीर के ऊतक धीरे-धीरे घुल जाते हैं और तरल रूप ले लेते हैं। इस तरल को पौधों में डाल दिया गया, ताकि वह प्रकृति का हिस्सा बन सके। जो हड्डियां बचीं, उन्हें सुखाकर पाउडर में बदला गया।
हड्डियां के पाउडर से बनी विंड चाइम
इसके बाद एक कलाकार की मदद से उस पाउडर को सांचे में ढालकर हल्के नीले रंग की विंड चाइम बनाई गई। वही रंग जो उनकी बहन को पसंद था। अब यह चाइम सिर्फ एक सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गई है।
डेथ एजुकेटर ने कही ये बात
एरिन, जो पेशे से ‘डेथ एजुकेटर’ हैं, मानती हैं कि विदाई के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर भी अपने प्रियजनों को याद रखने के कई रास्ते हो सकते हैं, उनके लिए यह विंड चाइम किसी अजीब चीज़ नहीं, बल्कि प्रेम और स्मृति का एक अनोखा रूप है। जहां हर हवा का झोंका एक एहसास बनकर लौटता है।
Written By Toshi Shah