नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर स्थित विशेष एनआईए अदालत ने मंगलवार को दिल्ली के लाल किला विस्फोट मामले में आरोपियों की न्यायिक हिरासत 12 अगस्त तक बढ़ा दी।
यह मामला नवंबर 2025 में लाल किले के निकट हुई कार बम विस्फोट की घटना से संबंधित है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) इस मामले में पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है। इनमें से एक आरोपी की विस्फोट में ही मृत्यु हो गई थी।
मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में नवगठित विशेष एनआईए अदालत में हुई। विशेष न्यायाधीश (एनआईए) प्रशांत शर्मा ने सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 12 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश दिया। अदालत अब एनआईए द्वारा दायर आरोपपत्र पर विचार करेगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी
एनआईए ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुज़ामिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, शोएब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार को अदालत में पेश किया।
इससे पहले 14 मई को एनआईए ने इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी ने 7,500 पृष्ठों का आरोपपत्र 10 आरोपियों के विरुद्ध दायर किया था।
नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुआ था विस्फोट
एनआईए के अनुसार, 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए उच्च क्षमता वाले वाहन-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) विस्फोट में 11 लोगों की मृत्यु हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। विस्फोट से आसपास की संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा था।
एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए हैं।
चार्जशीट में कथित मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमर उन नबी का भी नाम शामिल है। हालांकि उनकी मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। अन्य आरोपियों में आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुज़ामिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, शोएब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं।
एनआईए का आरोप है कि सभी आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े थे, जिसे अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) का एक संगठन बताया गया है। गृह मंत्रालय ने वर्ष 2018 में एजीयूएच को आतंकवादी संगठन घोषित किया था।
एजेंसी के अनुसार, जांच जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर में की गई। अभियोजन पक्ष के आरोपपत्र में 588 मौखिक गवाहियां, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त सामग्री शामिल हैं।
एनआईए ने लगाया "जिहादी साजिश" का आरोप
एनआईए ने आरोप लगाया है कि यह एक व्यापक कथित "जिहादी साजिश" का हिस्सा था, जिसमें कुछ कट्टरपंथी व्यक्तियों, जिनमें चिकित्सक भी शामिल बताए गए हैं, ने कथित रूप से AQIS/AGuH की विचारधारा से प्रेरित होकर काम किया।
जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि वर्ष 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक के दौरान आरोपियों ने संगठन को "AGuH Interim" के रूप में पुनर्गठित किया और "ऑपरेशन हेवनली हिंद" नामक अभियान शुरू करने की योजना बनाई, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार को उखाड़ फेंकना और शरीयत शासन स्थापित करना था।
एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर नए सदस्यों की भर्ती की, उग्रवादी विचारधारा का प्रचार किया, हथियार और गोला-बारूद एकत्र किए तथा बाजार में उपलब्ध रसायनों का उपयोग कर विस्फोटक तैयार किए। एजेंसी का दावा है कि विस्फोट में प्रयुक्त पदार्थ ट्राइएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड (TATP) था, जिसे कई प्रयोगों के बाद तैयार किया गया।
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जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रतिबंधित हथियारों, जैसे AK-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और देसी पिस्तौल, की अवैध खरीद की गई। साथ ही रॉकेट आधारित और ड्रोन से ले जाए जाने वाले आईईडी के प्रयोग भी किए गए, जिनका लक्ष्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों को बनाना था।
एनआईए ने कहा कि वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच, जिनमें डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और वॉयस विश्लेषण शामिल हैं, के आधार पर मृत आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान की पुष्टि की गई।
Written By: Pradeep Singh