सुबह-सुबह हर घर की रसोई से एक ही सवाल गूँजता है— "आज नाश्ते में क्या बनेगा?" और ज्यादातर जवाब होता है 'पोहा' या 'परांठा'। सुबह की भागदौड़ में जब किचन से परांठे की खुशबू आती है या पोहे का तड़का लगता है, तो दिन की शुरुआत ही बन जाती है। लेकिन स्वाद के साथ-साथ सेहत का ख्याल रखना भी जरूरी है। हम भारतीय इन दोनों के बिना अपने दिन की कल्पना भी नहीं कर सकते। एक तरफ हल्का-फुल्का और खिला-खिला पोहा है, तो दूसरी तरफ गरमा-गरम भरवां परांठा। स्वाद में तो दोनों 10/10 हैं, लेकिन जब बात सेहत की आती है, तो हम अक्सर उलझ जाते हैं कि आखिर बॉडी के लिए ज्यादा अच्छा क्या है। चलिए, आज इस कन्फ्यूजन को हमेशा के लिए दूर करते हैं।

परांठे का दम: पेट भी भरेगा और ताकत भी मिलेगी
अगर आपका दिन भागदौड़ भरा रहता है, तो परांठा आपका सबसे पक्का दोस्त है। गेहूं के आटे से बना परांठा शरीर को वो 'कॉम्प्लेक्स कार्ब्स' देता है जो धीरे-धीरे पचते हैं। इसका फायदा ये है कि एक परांठा खाने के बाद आपको दोपहर तक बार-बार कुछ और खाने की जरूरत महसूस नहीं होगी। लोग अक्सर इसे अनहेल्दी मानते हैं, लेकिन अगर आप इसमें पनीर, दाल या खूब सारी सब्जियां भरकर कम तेल में बनाएं, तो ये प्रोटीन और फाइबर का पावर हाउस बन जाता है। बस याद रखिए, इसे तेल में डुबोना नहीं है!

हेल्दी परांठा बनाने का सही तरीका
परांठा तभी तक हेल्दी है जब तक वह तेल या घी में 'नहाया' हुआ न हो। अगर आप इसे कम घी में सेकते हैं और साथ में एक कटोरी दही या ताजी चटनी लेते हैं, तो यह एक कम्पलीट मील है। वजन का ध्यान रखने वाले लोग इसमें रागी या बाजरे का आटा मिला सकते हैं, जिससे इसकी पौष्टिकता दोगुनी हो जाती है।

पोहे का जादू: हल्का अहसास और वजन पर कंट्रोल
दूसरी तरफ पोहा उन लोगों के लिए वरदान है जो सुबह-सुबह कुछ हल्का खाना पसंद करते हैं। चपटे चावल (Poha) से बना यह नाश्ता पचने में बहुत आसान होता है। इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है इसमें कैलोरी की कम मात्रा। वेट लॉस करने वालों के लिए तो ये किसी वरदान से कम नहीं क्योंकि इसमें कैलोरी काफी कम होती है। सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें आयरन होता है और अगर आप इसमें नींबू निचोड़ दें, तो विटामिन-C की मदद से वो आयरन शरीर में अच्छी तरह सोख लिया जाता है। मटर और मूंगफली का तड़का इसे और भी मजेदार बना देता है।

कौन सा नाश्ता आपके लिए बना है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों ही अपनी जगह बेस्ट हैं, बस आपको अपनी जरूरत पहचाननी है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं या ऑफिस में बैठकर काम करना है जहाँ ज्यादा फिजिकल मेहनत नहीं है, तो पोहा चुनिए। लेकिन अगर आप वर्कआउट करते हैं या आपको लंबी दूरी तय करनी है, तो परांठा आपको ज्यादा देर तक एनर्जी देगा।

मजे की बात ये है कि आप दोनों को अपनी डाइट में बदल-बदल कर शामिल कर सकते हैं। बस याद रखें, पोहा हो या परांठा, पोषण उसके बनाने के तरीके और साथ में परोसी जाने वाली चीजों (जैसे दही या सब्जी) में छिपा होता है।

Written by: Anushka sagar