महिलाओं के लिए महीने के वो 5-6 दिन किसी जंग से कम नहीं होते। शरीर में हार्मोन्स का खेल ऐसा चलता है कि कभी मूड खराब होता है तो कभी पेट का हाल बेहाल। हम अक्सर सोचते हैं कि फल खाना तो हमेशा अच्छा ही होता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि पीरियड्स के दौरान कुछ फल आपकी तकलीफ को घटाने के बजाय कई गुना बढ़ा सकते हैं?

जी हाँ, कुछ फल ऐसे हैं जो ब्लोटिंग (पेट फूलना), तेज दर्द और ज्यादा ब्लीडिंग की वजह बन सकते हैं। आइए जानते हैं किन फलों से आपको इन दिनों दूरी बना लेनी चाहिए

अनानास (Pineapple): बढ़ा सकता है ब्लीडिंग
अनानास वैसे तो बहुत टेस्टी होता है, लेकिन पीरियड्स में यह थोड़ा 'खतरनाक' हो सकता है। इसमें मौजूद एक खास तत्व 'ब्रोमेलैन' गर्भाशय की मांसपेशियों को ज्यादा रिलैक्स कर देता है, जिससे ब्लड फ्लो अचानक बढ़ सकता है। अगर आपको पहले से हैवी ब्लीडिंग की समस्या है, तो इसे बिल्कुल न खाएं।

तरबूज (Watermelon): पेट फूलने की समस्या
गर्मियों में तरबूज राहत देता है, पर पीरियड्स में नहीं। इसमें पानी बहुत ज्यादा होता है और इन दिनों महिलाओं के शरीर में पहले से ही 'वॉटर रिटेंशन' यानी पानी जमा होने की दिक्कत रहती है। तरबूज खाने से पेट और ज्यादा फूला हुआ (Bloating) महसूस होने लगता है और भारीपन बढ़ जाता है।

खट्टे फल (संतरा, नींबू): एसिडिटी का डर
अगर आपको पीरियड्स के दौरान जी मिचलाने या सीने में जलन की शिकायत रहती है, तो संतरा और नींबू जैसे खट्टे फलों से बचें। इनमें मौजूद एसिड पेट की गर्मी बढ़ा सकता है, जिससे आपको बेचैनी और डाइजेशन की दिक्कत हो सकती है।

कच्चा केला: कब्ज की आफत
पका हुआ केला तो इन दिनों वरदान है, लेकिन कच्चा केला बिल्कुल उल्टा काम करता है। इसे पचाना शरीर के लिए मुश्किल होता है, जिससे कब्ज (Constipation) हो सकती है। पीरियड्स में जब पेट पहले ही संवेदनशील होता है, तब कब्ज आपकी तकलीफ को और असहनीय बना सकती है।

मीठे ड्राई फ्रूट्स: मूड और क्रैम्प्स का दुश्मन
बाजार में मिलने वाले वो ड्राई फ्रूट्स जिन पर चीनी की परत चढ़ी होती है, वे शरीर में सूजन बढ़ाते हैं। ज्यादा चीनी खाने से मूड स्विंग्स (अचानक गुस्सा या रोना आना) और पेट के क्रैम्प्स ज्यादा महसूस होने लगते हैं।

तो फिर राहत के लिए क्या खाएं?
इन मुश्किल दिनों में पका हुआ केला, ताजे सेब, कीवी और स्ट्रॉबेरी आपके सबसे अच्छे दोस्त हैं। इनमें फाइबर और मैग्नीशियम होता है जो मांसपेशियों के खिंचाव को कम करता है और आपको कमजोरी महसूस नहीं होने देता।

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Written by: Anushka sagar