Bihar News: बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल, शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही वे बिहार के छठे ऐसे नेता बन गए हैं, जिन्होंने देश के चारों सदनों लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद की सदस्यता ग्रहण की है। इस उपलब्धि की चर्चा राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनमानस तक हो रही है।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर लंबा और अनुभवों से भरा रहा है। उन्होंने 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद वे कई बार लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्र सरकार में कृषि मंत्री तथा रेल मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया। राज्य राजनीति में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है, जहां वे कई बार विधान परिषद के सदस्य बने और लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में नेतृत्व करते रहे।
सीएम नीतीश अनुभवी नेताओं में से एक: पीएम
राज्यसभा में शपथ लेने के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि नीतीश कुमार अब सक्रिय मंत्री पद की भूमिका में नहीं रहेंगे, बल्कि पार्टी को मार्गदर्शन देने का कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक बताया जाना उनकी राजनीतिक साख को और मजबूत करता है। इस सूची में शामिल अन्य प्रमुख नेताओं में नागमणि, लालू प्रसाद यादव, सुशील कुमार मोदी, रामकृपाल यादव और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं ने अपने-अपने समय में चारों सदनों में सदस्यता हासिल कर विशेष पहचान बनाई है।
1977 से शुरू हुआ नागमणि का राजनीतिक सफर
नागमणि, जो अपने राजनीतिक जीवन में कई दलों के साथ जुड़े रहे, ने 1977 में विधायक के रूप में शुरुआत की और बाद में सांसद, विधान परिषद सदस्य तथा राज्यसभा सदस्य भी रहे। वहीं लालू प्रसाद यादव ने भी अपने करियर में चारों सदनों में भूमिका निभाई और केंद्र में रेल मंत्री के रूप में कार्य किया।
लंबे सफर के बाद सुशील मोदी भी गए राज्यसभा
सुशील कुमार मोदी ने छात्र राजनीति से शुरुआत कर विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषद और राज्यसभा तक का सफर तय किया। वहीं रामकृपाल यादव और उपेंद्र कुशवाहा ने भी विभिन्न सदनों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई है। अब इस सूची में नीतीश कुमार का नाम जुड़ना उनके राजनीतिक करियर की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह न केवल उनके अनुभव को दर्शाता है, बल्कि बिहार की राजनीति में उनके प्रभाव और लंबे योगदान को भी रेखांकित करता है।
Writen By: Geeta Sharma