अंतरिक्ष की दुनिया से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नासा के आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन ने इंसान को पृथ्वी से इतनी दूर पहुँचा दिया है, जहाँ आज तक कोई नहीं गया था। सोमवार रात भारतीय समय के अनुसार करीब 11:27 बजे, इस मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्रियों ने 1970 के 'अपोलो-13' मिशन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। अब ये यात्री पृथ्वी से करीब 2.5 लाख मील की दूरी पर हैं, जो मानव इतिहास में सबसे ज्यादा है।
पहली बार दिखा चांद का 'छिपा हुआ' हिस्सा
इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के उस हिस्से (फार साइड) को अपनी आँखों से देखा, जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता। करीब 6 घंटे तक चले इस 'फ्लाईबाय' के दौरान यान चांद के बेहद करीब से गुजरा। नासा ने बताया कि जैसे ही अंतरिक्ष यात्री चांद के पिछले हिस्से के पास पहुँचे, उन्हें खिड़की से चांद का वो नजारा दिखा जिसे पहले कभी किसी इंसान ने इतनी करीब से नहीं देखा था।
टूटा 56 साल पुराना रिकॉर्ड, 10 अप्रैल को होगी वापसी
बता दें कि साल 1970 में अपोलो-13 ने सबसे ज्यादा दूरी का रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन अब आर्टेमिस-2 (Artemis II) उससे भी आगे निकल गया है। यह मिशन 10 दिन का है और सब कुछ ठीक रहा तो 10 अप्रैल को अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में लैंड करेगा। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो ओरियन यान के जरिए इस सफर को पूरा कर रहे हैं। नासा का कहना है कि यह कामयाबी भविष्य में चांद पर इंसानों के बसने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अगला मिशन होगा चांद पर लैंडिंग
आर्टेमिस-2 (Artemis II) का मकसद सिर्फ चांद के पास से गुजरना और नए रिकॉर्ड बनाना है। इसके बाद नासा का अगला बड़ा लक्ष्य साल 2028 तक चांद के साउथ पोल (दक्षिणी ध्रुव) पर इंसानों को उतारना है। फिलहाल, ये चारों यात्री सुरक्षित हैं और अपने सफर के आखिरी पड़ाव की तरफ बढ़ रहे हैं। इस मिशन की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि अगले दो-तीन सालों में इंसान एक बार फिर चांद की सतह पर कदम रखने वाला है।
Written by: Anushka sagar