आज दुनिया भर में ईस्टर संडे बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। ईसाई धर्म में यह दिन बेहद खास माना जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसी दिन प्रभु यीशु मसीह ने मृत्यु पर विजय पाई और पुनर्जीवित हुए। इस दिन हर जगह रंग-बिरंगे अंडे और मिठाइयां देखने को मिलती हैं। इस साल आज यानी 5 अप्रैल को ईस्टर संडे मनाया जा रहा है। इस दिन लोग सुबह चर्च जाकर प्रार्थना करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को 'हैप्पी ईस्टर' कहते हुए अंडे और मिठाइया, बांटते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ईस्टर पर अंडों का क्या महत्व है?

अंडा: जीवन और उम्मीद का प्रतीक

अंडा बाहर से भले ही सख्त और साधारण लगे, इसके भीतर जीवन की शुरुआत छिपी होती है। ईसाई धर्म में अंडा प्रभु यीशु के पुनर्जीवन का प्रतीक माना जाता है, जैसे चूजा अंडे को तोड़कर बाहर आता है, वैसे ही यीशु ने मृत्यु को पार कर नया जीवन पाया। इसलिए अंडा 'नए जीवन' और 'उम्मीद' का संदेश देता है।

अंडों को रंगने की परंपरा

शुरुआत में लोग अंडों को केवल लाल रंग से सजाते थे, जो यीशु के बलिदान और उनके खून का प्रतीक था। आजकल लोग इसे खुशी और उत्सव के प्रतीक के रूप में नीला, पीला, सुनहरा और अन्य चमकदार रंगों में रंगते हैं। अब बाजारों में असली अंडों की जगह लकड़ी, प्लास्टिक और चॉकलेट वाले अंडे भी बहुत लोकप्रिय हैं।

बच्चों के लिए ‘एग हंट’

ईस्टर पर बच्चों के लिए एग हंट का खेल आयोजित किया जाता है। इसमें बड़े लोग घर या बगीचे के कोनों में चॉकलेट और उपहारों से भरे अंडे छिपा देते हैं, और बच्चे उन्हें खोजते हैं। यह खेल उस खुशी और आश्चर्य की याद दिलाता है जब यीशु के अनुयायियों ने उनकी खाली कब्र देखी थी।

  Written By Toshi Shah