भारत ने न्यूक्लियर पावर के मामले में आज दुनिया को अपनी असली ताकत दिखा दी है। तमिलनाडु के कलपक्कम में सालों से जिस 'प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' (PFBR) पर काम चल रहा था, उसने आज बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। यह रिएक्टर अब पूरी तरह एक्टिव (Critical) हो गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर इस जीत का ऐलान किया। पीएम ने इसे देश के लिए गर्व की बात बताते हुए कहा कि यह हमारे न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे स्टेज की बहुत बड़ी सफलता है।

pm modi

रूस को दी टक्कर
इस रिएक्टर की सबसे खास बात ये है कि ये जितना फ्यूल इस्तेमाल करेगा, उससे कहीं ज़्यादा पैदा करने की ताकत रखता है। इसी वजह से इसे 'ब्रीडर' रिएक्टर कहा जाता है। अब तक इस तरह की कमर्शियल तकनीक सिर्फ रूस के पास थी, लेकिन अब भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसने यह मुकाम हासिल किया है। पीएम मोदी के मुताबिक, यह हमारी साइंटिफिक गहराई और स्वदेशी इंजीनियरिंग का जीता-जागता सबूत है। अब हमें यूरेनियम के लिए दूसरे देशों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

थोरियम से चमकेगा भविष्य
कलपक्कम की यह कामयाबी सिर्फ एक प्लांट की सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत के विशाल थोरियम भंडार को इस्तेमाल करने का रास्ता है। भारत में थोरियम बहुत ज़्यादा मात्रा में मौजूद है और यह रिएक्टर उसी थोरियम से बिजली बनाने के मिशन का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हम थोरियम का सही इस्तेमाल शुरू कर देते हैं, तो भारत में आने वाली कई पीढ़ियों तक बिजली की कोई कमी नहीं होगी। यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में ग्लोबल सुपरपावर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।

पूरी तरह 'मेड इन इंडिया'
आपको बता दें कि पिछले साल मार्च में खुद पीएम मोदी कलपक्कम पहुंचे थे और इस काम का जायजा लिया था। यह पूरा प्रोजेक्ट 'मेड इन इंडिया' है, यानी इसे तैयार करने में किसी विदेशी तकनीक का नहीं बल्कि भारतीय दिमाग का इस्तेमाल हुआ है। इस जीत के बाद न केवल हमारी पावर सप्लाई मजबूत होगी, बल्कि दुनिया भर में भारत का रूतबा भी बढ़ गया है। आज सोशल मीडिया पर लोग कलपक्कम के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की जमकर तारीफ कर रहे हैं, जिन्होंने भारत को इस खास क्लब में शामिल करवा दिया है।

Written by: Anushka sagar