पश्चिम बंगाल सरकार के एक फैसले के बाद मिड-डे मील योजना को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सरकार ने इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी इस्कॉन से जुड़ी अन्नामित्र फाउंडेशन को सौंपने का निर्णय लिया है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि बच्चों की थाली से अंडा हटाकर उसकी जगह सोया आधारित खाद्य पदार्थ दिए जाएं, तो क्या बच्चों को समान स्तर का पोषण मिल पाएगा? यह विवाद केवल भोजन के विकल्प का नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और उनके शारीरिक विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

सोयाबीन पौधों से मिलने वाली प्रोटीन स्रोतों में से एक

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सोयाबीन पौधों से मिलने वाले सबसे अच्छे प्रोटीन स्रोतों में से एक है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी नौ अमीनो एसिड पाए जाते हैं, इसलिए इसे 'कंप्लीट प्रोटीन' माना जाता है। 100 ग्राम सूखे सोया चंक्स में लगभग 52 ग्राम प्रोटीन और करीब 13 ग्राम फाइबर होता है। साथ ही इसमें फैट कम और ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है, जिससे यह वजन नियंत्रण और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

अंडा सर्वोत्तम प्रोटीन स्रोतों में गिना जाता है

दूसरी ओर, एक अंडे में लगभग 6 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिलता है। इसके अलावा अंडा विटामिन B12, विटामिन D, कोलीन और हेल्दी फैट जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का भी अच्छा स्रोत है। खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए ये पोषक तत्व बेहद जरूरी होते हैं, क्योंकि उनके नियमित भोजन में इनकी कमी अक्सर देखी जाती है। अंडे का प्रोटीन शरीर द्वारा लगभग पूरी तरह अवशोषित कर लिया जाता है, इसलिए इसे पोषण विज्ञान में सर्वोत्तम प्रोटीन स्रोतों में गिना जाता है।

प्रोटीन की गुणवत्ता कैसे तय होगी?

यदि तुलना करें तो लगभग 50 ग्राम पनीर में 9 से 10 ग्राम प्रोटीन और 25 ग्राम सूखे सोया चंक्स में करीब 13 ग्राम प्रोटीन मिलता है। यानी केवल मात्रा के आधार पर सोया सबसे आगे है। लेकिन पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटीन की गुणवत्ता केवल उसकी मात्रा से तय नहीं होती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि शरीर उसे कितनी आसानी से पचा और उपयोग कर सकता है।

अंडा बेहतर या फिर सोया?

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि केवल प्रोटीन की मात्रा को देखा जाए तो सोया अंडे से बेहतर दिखाई देता है। लेकिन पोषण, पाचन क्षमता और जैव उपलब्धता के लिहाज से अंडा अब भी सबसे प्रभावी विकल्प माना जाता है। यदि किसी कारणवश मिड-डे मील में अंडे की जगह केवल सोया दिया जाता है, तो विटामिन B12, कोलीन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए भोजन में अतिरिक्त खाद्य पदार्थ शामिल करना जरूरी होगा। इसलिए बच्चों के संतुलित पोषण के लिए किसी भी बदलाव से पहले वैज्ञानिक और पोषण संबंधी पहलुओं का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

 

Written By: Geeta Sharma