आजकल जब लोग नया स्मार्टफोन खरीदने जाते हैं तो उनका फोकस आमतौर पर कैमरा, बैटरी, प्रोसेसर और रैम जैसी खूबियों पर रहता है। हालांकि, डिस्प्ले से जुड़ी एक ऐसी तकनीक भी है जो फोन इस्तेमाल करने के अनुभव को काफी बेहतर बना सकती है। इस तकनीक को रिफ्रेश रेट कहा जाता है। पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन कंपनियों ने 90Hz, 120Hz और 144Hz रिफ्रेश रेट वाले कई डिवाइस लॉन्च किए हैं। पहले यह फीचर केवल महंगे प्रीमियम स्मार्टफोन्स तक सीमित था, लेकिन अब मिड-रेंज सेगमेंट में भी यह आसानी से उपलब्ध है। ऐसे में नया फोन खरीदने से पहले रिफ्रेश रेट के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है।
क्या होती है रिफ्रेश रेट?
रिफ्रेश रेट से तात्पर्य उस संख्या से है, जितनी बार किसी स्मार्टफोन की स्क्रीन एक सेकंड में खुद को अपडेट करती है। इसे हर्ट्ज (Hz) में मापा जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी फोन की स्क्रीन 60Hz रिफ्रेश रेट के साथ आती है, तो वह हर सेकंड 60 बार स्क्रीन को अपडेट करती है। इसी प्रकार 90Hz स्क्रीन 90 बार और 120Hz स्क्रीन 120 बार रिफ्रेश होती है। स्क्रीन पर दिखने वाली तस्वीरें लगातार बदलते फ्रेम्स से बनती हैं और रिफ्रेश रेट जितनी अधिक होगी, विजुअल अनुभव उतना ही अधिक स्मूद दिखाई देगा।
अधिक रिफ्रेश रेट क्यों माना जाता है बेहतर?
हाई रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन उपयोगकर्ताओं को अधिक सहज और स्मूद अनुभव प्रदान करती है। सोशल मीडिया फीड स्क्रॉल करना, विभिन्न ऐप्स के बीच स्विच करना या यूजर इंटरफेस में नेविगेट करना काफी फ्लूइड महसूस होता है। एक बार 120Hz डिस्प्ले का उपयोग करने के बाद कई लोगों को 60Hz स्क्रीन अपेक्षाकृत धीमी लगने लगती है। इसका कारण यह है कि उच्च रिफ्रेश रेट स्क्रीन पर होने वाली गतिविधियों को अधिक प्राकृतिक और तेज बनाती है।
60Hz, 90Hz और 120Hz में क्या अंतर है?
60Hz रिफ्रेश रेट
यह लंबे समय तक स्मार्टफोन इंडस्ट्री का मानक रहा है। सामान्य कॉलिंग, मैसेजिंग और इंटरनेट ब्राउजिंग के लिए यह पर्याप्त माना जाता है। बजट स्मार्टफोन्स में आज भी यह रिफ्रेश रेट देखने को मिल जाती है।
90Hz रिफ्रेश रेट
यह 60Hz की तुलना में अधिक स्मूद अनुभव देती है। सोशल मीडिया इस्तेमाल, ऐप्स के बीच ट्रांजिशन और सामान्य मल्टीमीडिया उपयोग में इसका अंतर आसानी से महसूस किया जा सकता है।
120Hz रिफ्रेश रेट
यह सबसे बेहतर और फ्लूइड विजुअल अनुभव प्रदान करती है। गेमिंग, तेज स्क्रॉलिंग और हाई फ्रेम-रेट कंटेंट देखने के दौरान इसका लाभ साफ तौर पर नजर आता है। यही कारण है कि आज कई मिड-रेंज और फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स में 120Hz डिस्प्ले एक आम फीचर बन चुकी है।
रिफ्रेश रेट कीतना महत्वपूर्ण
स्मार्टफोन खरीदते समय केवल कैमरा या बैटरी पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। रिफ्रेश रेट भी एक महत्वपूर्ण फीचर है, जो आपके दैनिक उपयोग के अनुभव को सीधे प्रभावित करता है। यदि आप स्मूद स्क्रॉलिंग, बेहतर गेमिंग और अधिक फ्लूइड डिस्प्ले चाहते हैं, तो 90Hz या 120Hz रिफ्रेश रेट वाला स्मार्टफोन आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
Written By Toshi Shah