अक्सर हमें लगता है कि भूलने की बीमारी सिर्फ बुढ़ापे में होती है, लेकिन इसकी शुरुआत 40 की उम्र से ही होने लगती है। डॉक्टर कहते हैं कि 40 की उम्र हमारे दिमाग के लिए एक खास मोड़ है। इस समय हम जो भी खाते-पीते हैं, उसका सीधा असर हमारी आने वाली जिंदगी की दिमागी सेहत पर पड़ता है। अगर आप चाहते हैं कि आने वाले सालों में आपकी याददाश्त बनी रहे, तो अभी से अपनी थाली पर ध्यान देना शुरू कर दें।

40 की उम्र के बाद क्या होता है?
डॉक्टरों के मुताबिक, 40 के बाद हमारा दिमाग थोड़ा धीरे काम करने लगता है और चीजों को याद रखने की ताकत में हल्की गिरावट आने लगती है। अगर हमारी लाइफस्टाइल खराब है, तो दिमाग के कमजोर होने की रफ्तार और तेज हो जाती है। इसीलिए, इस उम्र में अपनी आदतों को सुधारना बहुत जरूरी है ताकि बुढ़ापे में दिमागी बीमारियों का खतरा कम हो सके।

गलत खाने से दिमाग पर पड़ता है बुरा असर
ज्यादा चीनी, बाहर का जंक फूड और पैकेट बंद चीजें हमारे दिमाग को नुकसान पहुँचाती हैं। इससे दिमाग में तनाव पैदा होता है, जो धीरे-धीरे सोचने-समझने की शक्ति को खत्म करने लगता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि खाने को लेकर तीन बातें गाँठ बांध लें: सही समय पर खाएं, अच्छी चीजें खाएं और जितनी भूख हो उतना ही खाएं। खासकर रात को देर से भारी खाना खाने की आदत दिमाग के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है।

थाली में शामिल करें ये जरूरी चीजें
दिमाग को तेज और जवान रखने के लिए फल, हरी सब्जियां, बीज और नट्स (जैसे अखरोट-बादाम) बहुत जरूरी हैं। फलों में जामुन या ब्लूबेरी जैसे फल दिमाग के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। ये चीजें दिमाग को होने वाले नुकसान को रोकती हैं। साथ ही, सफेद चीनी और मैदे से बनी चीजों से जितना हो सके दूरी बना लें, क्योंकि ये दिमाग को सुस्त बना देती हैं।

छोटी आदतें, बड़ा फायदा
दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए आपको अपनी जिंदगी पूरी तरह पलटने की जरूरत नहीं है। बस कुछ छोटी आदतें बदलें—जैसे चाय के साथ बिस्कुट या समोसे की जगह फल या सूखे मेवे खाएं। खाने में सलाद की मात्रा बढ़ा दें और बाहर का तला-भुना खाना कम कर दें। ये छोटे-छोटे बदलाव आपकी याददाश्त और फोकस को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखेंगे।

Written by: Anushka sagar