आजकल नेचुरल ब्यूटी प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। लोग स्किनकेयर से लेकर मेकअप तक में ऐसी चीजों को पसंद कर रहे हैं, जिनमें प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल हो। इसी वजह से पुराने समय में इस्तेमाल होने वाले देसी नुस्खे भी फिर से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। सुरमा भी इन्हीं पारंपरिक चीजों में शामिल है। पुराने समय में कई घरों में इसे आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। कुछ परिवारों में इसे आंखों को ठंडक देने वाला मानकर बच्चों और बड़ों दोनों की आंखों में लगाने की परंपरा भी रही है।

घर पर बनता था देसी सुरमा

पहले बाजार में मिलने वाले काजल या सुरमे की जगह घर पर ही कालिख तैयार करके उसका इस्तेमाल किया जाता था। इसके लिए घी, तेल, बादाम और अजवाइन जैसी चीजों का सहारा लिया जाता था। हालांकि, आंखें शरीर के बेहद संवेदनशील अंगों में शामिल हैं। इसलिए घर पर तैयार किसी भी चीज को आंखों में लगाने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

घर पर ऐसे तैयार होती थी कालिख

पारंपरिक तरीके से सुरमा बनाने के लिए सबसे पहले एक छोटा मिट्टी या धातु का दीया लिया जाता था। इसमें अरंडी का तेल या शुद्ध घी डालकर बाती जलाई जाती थी। इसके बाद दीये को दो मजबूत और समान ऊंचाई वाले आधारों के बीच रखा जाता था।

लौ से प्लेट पर ऐसे जमा होती है कालिख

दीये के ऊपर एक साफ धातु की प्लेट इस तरह रखी जाती थी कि लौ का ऊपरी हिस्सा प्लेट की निचली सतह के करीब रहे। जलती हुई लौ से निकलने वाला धुआं धीरे-धीरे प्लेट पर काली कालिख की परत जमा करता था। करीब 40 से 50 मिनट बाद दीये को बुझाकर प्लेट को ठंडा किया जाता था।

कालिख में घी मिलाकर ऐसे तैयार होता था सुरमा

प्लेट पर जमा कालिख को साफ चम्मच या उपकरण से निकालकर एक स्वच्छ बर्तन में रखा जाता था। इसमें थोड़ी मात्रा में शुद्ध घी मिलाकर गाढ़ा मिश्रण तैयार किया जाता था। सूखा सुरमा बनाने के लिए घी की मात्रा कम रखी जाती थी। तैयार मिश्रण को साफ और सूखे डिब्बे में रखा जाता था।

बादाम और अजवाइन का इस्तेमाल

कुछ पारंपरिक तरीकों में बादाम या अजवाइन की मदद से भी कालिख तैयार की जाती थी। इन्हें लौ के ऊपर रखकर निकलने वाली कालिख को इकट्ठा किया जाता था। माना जाता था कि बादाम से तैयार कालिख गहरा रंग देती है, जबकि अजवाइन आंखों को ठंडक पहुंचाने में मदद करती है।

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आंखों की सुरक्षा से न करें समझौता

हालांकि, इन पारंपरिक दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसलिए घरेलू सुरमे को आंखों की बीमारी का इलाज नहीं समझना चाहिए। आंखों में लगाने वाली किसी भी चीज में साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। खासकर बच्चों की आंखों में घरेलू सुरमा या काजल लगाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना सुरक्षित विकल्प है।