Rahul Gandhi SIR Petition: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं की याचिका में 14 खामियां सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 12 अक्टूबर को इन आपत्तियों को दर्ज किया। साथ ही याचिकाकर्ताओं से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त एसएस संधू व विवेक जोशी को निजी पक्षकार के रूप में याचिका में क्यों शामिल किया गया है।

यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है। इसमें चुनाव आयोग की ओर से SIR से जुड़े फैसले लेने और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, रजिस्ट्री की आपत्तियां याचिका की फाइलिंग और दस्तावेजों से जुड़ी हैं। इन्हें याचिका के आरोपों पर अदालत के अंतिम फैसले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

CEC और दो चुनाव आयुक्तों को पक्षकार बनाने पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त एसएस संधू तथा विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाए जाने पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह आपत्ति इस संदर्भ में उठाई गई है कि याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है।

रजिस्ट्री ने याचिका के लिस्टिंग प्रोफॉर्मा में प्रतिवादी के नाम को ठीक करने, पेज नंबर 9 पर प्रतिवादियों का विवरण सुधारने और याचिका में राहत की मांग वाले हिस्से में प्रतिवादी का सही क्रमांक दर्ज करने को भी कहा है।

याचिका में दस्तावेजों से जुड़ी कई कमियां
रजिस्ट्री ने याचिका में पहले इसी विवाद या संबंधित आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने के संबंध में जरूरी घोषणा नहीं मिलने पर भी आपत्ति जताई है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत यह बताना जरूरी है कि क्या याचिकाकर्ताओं ने पहले भी इसी आदेश या फैसले को चुनौती दी थी। अगर ऐसा किया गया था, तो उस कार्यवाही का परिणाम भी बताना होगा। रजिस्ट्री ने इस कमी को दो बार “SIMILARITY PARA NOT FOUND” के रूप में दर्ज किया है।

इसके अलावा, याचिका में 24 जून 2025 के उस फैसले की प्रति संलग्न करने को कहा गया है, जिसका उल्लेख राहत की मांग के एक हिस्से में किया गया है। रजिस्ट्री ने यह भी बताया कि Annexure P-2 की तारीख याचिका में दिए गए विवरण से मेल नहीं खाती, जबकि Annexure P-5 में दर्ज केस नंबर को लेकर भी आपत्ति है। Annexure P-6 के लिए पेन ड्राइव जमा करने का निर्देश दिया गया है।

वकालतनामा, पहचान पत्र और कोर्ट फीस पर भी आपत्ति
याचिका की फाइलिंग में कुछ जरूरी दस्तावेजों की कमी भी बताई गई है। रजिस्ट्री के मुताबिक, याचिकाकर्ता संख्या 3 से 11 तक के वकालतनामे उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, याचिकाकर्ता संख्या 2 के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति मांगी गई है। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं को कोर्ट फीस के तौर पर 220 रुपये अतिरिक्त जमा करने को कहा गया है। पेज 57 और 64 की रंगीन प्रतियां देने का निर्देश भी दिया गया है। दस्तावेजों की प्रस्तुति और पढ़ने में स्पष्टता को लेकर भी कई आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इनमें धुंधले या अस्पष्ट पन्ने, छोटे फॉन्ट, गायब पेज, स्थानीय भाषा में मौजूद एक पन्ना और पेज नंबरों में गड़बड़ी शामिल हैं। रजिस्ट्री ने अंतिम प्रिंटआउट लेने के बाद इन कमियों की पहचान करने की बात भी कही है।

SIR के किन मुद्दों को चुनौती दे रहे हैं विपक्षी नेता?
राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं की जांच की मांग की है। याचिका में चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज, फॉर्म-6 में बदलाव, ECINET और ERONET की कार्यप्रणाली तथा मतदाताओं के नाम हटाने या दोबारा बहाल करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग की संबंधित फाइलें, एजेंडा, बैठक की कार्यवाही, नोटिंग और आपत्तियां रिकॉर्ड पर मंगाने की मांग की है। साथ ही, यह जांच कराने की मांग की गई है कि आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और वर्ष 2023 के संबंधित कानून की धारा 18 के अनुरूप काम किया या नहीं।

मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए स्वतंत्र ऑडिट की मांग
याचिका में मतदाता सूची के डेटाबेस और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने निर्देश देने की मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले।

यह याचिका 12 अक्टूबर को दाखिल की गई थी। इससे पहले, 11 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश की ओर से लिखित सूचना में बताया गया था कि इसी तरह के मुद्दों से जुड़े मामले 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। याचिकाकर्ताओं को 12 अक्टूबर को भौतिक रूप से या ई-फाइलिंग के माध्यम से याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई थी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका में प्रक्रियागत और दस्तावेजी कमियों को दूर करने के लिए आपत्तियां दर्ज की हैं। इन आपत्तियों से याचिका के मूल आरोपों पर अदालत का कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। मामले में आगे की कार्यवाही के लिए इन कमियों को दूर करना अहम होगा। 

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