SIR Controversy: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की सियासत में घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के बाद अब विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मांग की है कि जब तक सभी पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो जाते, तब तक पुराने मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए जाने चाहिए। वहीं, केरलम के नेताओं ने भी राहुल गांधी के आंदोलन का समर्थन करते हुए इसे लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की लड़ाई बताया है। दूसरी ओर, बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उस पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
ममता बनर्जी की दो टूक- पहले वोटर लिस्ट में जुड़ें सभी के नाम
ममता बनर्जी ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सभी पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में होने चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक पुराने मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए जाने चाहिए। उनके इस बयान से साफ है कि SIR को लेकर विपक्ष का विरोध केवल राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव कराने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के कारण पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
इससे पहले सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं और समर्थकों ने दिल्ली में मार्च निकाला था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी के समर्थन में उतरे केरलम के नेता
केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन को लोकतंत्र की रक्षा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संघर्ष बताया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में शामिल होना उनके लिए गर्व की बात है।
सतीशन ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में मतदाता सूचियों को प्रभावित करने की कोशिशें हुई हैं, खासकर उन राज्यों में जहां बीजेपी के सत्ता में आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए लोकतांत्रिक ताकतों और करोड़ों लोगों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है, तो इसका असर नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
पी.के. कुन्हालीकुट्टी ने भी उठाए सवाल, CEC के इस्तीफे की मांग
केरलम के मंत्री पी.के. कुन्हालीकुट्टी ने भी देशभर के लोगों से राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है और विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन करने के लिए लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेंगे, जब तक वह इस्तीफा नहीं देते।
उन्होंने यह भी दावा किया कि केरलम में सतर्कता के कारण SIR अपने घोषित उद्देश्य को हासिल नहीं कर सका।
बीजेपी का पलटवार- हारने पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है विपक्ष
विपक्ष के आरोपों के बीच बीजेपी ने भी मोर्चा खोल दिया है। असम बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर देश में अस्थिरता का माहौल बनाने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। सैकिया ने कहा कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है, तब उसे EVM और चुनाव आयोग की व्यवस्था सही लगती है, लेकिन हारने पर वही व्यवस्था उसे गलत दिखाई देने लगती है। उन्होंने इसे कांग्रेस का दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि जनता अब इसे समझ चुकी है।
उन्होंने बताया कि विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए बीजेपी मंगलवार को असम में जन-जागरूकता रैली भी आयोजित करेगी।
गिरिराज सिंह ने भी साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल उन्हीं राज्यों में चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, जहां उसे हार का सामना करना पड़ता है। गिरिराज सिंह ने हिमाचल प्रदेश, केरलम, तेलंगाना और कर्नाटक का जिक्र करते हुए कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस जीतती है, वहां उसे चुनाव आयोग और EVM पर भरोसा रहता है, जबकि हारने पर वह इन्हीं संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगती है।
उन्होंने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि जनता इस रवैये को देख रही है।
वोटर लिस्ट से सुप्रीम कोर्ट तक, अब सियासी लड़ाई किस मोड़ पर पहुंचेगी?
SIR को लेकर अब राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। एक ओर ममता बनर्जी और INDIA गठबंधन के नेता पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और निष्पक्ष चुनाव की मांग उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगा रही है। इस पूरे विवाद का केंद्र मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली है। विपक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब सवाल यही है कि SIR को लेकर उठे इन सवालों पर अदालत क्या रुख अपनाती है और क्या सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच जारी यह टकराव किसी समाधान तक पहुंच पाएगा?