नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारत की BRICS में भागीदारी केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें पूरे देश का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से BRICS से जुड़े विचार-विमर्श में विपक्ष को भी शामिल करने की मांग की।
दुनिया की आधी आबादी BRICS से जुड़ी है
मीडिया से बातचीत में खुर्शीद ने BRICS के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह समूह दुनिया की बड़ी आबादी, व्यापार और उभरती आर्थिक ताकत का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया की करीब आधी आबादी BRICS से जुड़ी है, तो उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
BRICS की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका
खुर्शीद ने कहा कि BRICS में ऐसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जो आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाएंगी। साथ ही यह छोटे और विकासशील देशों तथा ग्लोबल साउथ के हितों को भी सामने रखता है।
उन्होंने BRICS को ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच एक पुल बताया। उनके मुताबिक, भारत के पास इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता होने के कारण उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है और पूरी दुनिया की नजर भारत पर है।
BRICS की अध्यक्षता सरकार ही नहीं पूरे देश की जिम्मेदारी
कांग्रेस नेता ने कहा कि BRICS की अध्यक्षता को केवल मौजूदा सरकार की पहल नहीं, बल्कि पूरे देश की राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विपक्ष भी भारत का हिस्सा है और BRICS से जुड़े प्रतिनिधित्व एवं विचार-विमर्श में विपक्ष को उचित स्थान मिलना चाहिए। खुर्शीद ने कहा कि अगर सरकार ने विपक्ष से सलाह-मशविरा किया होता तो यह और बेहतर होता।
यह भारत की BRICS की चौथी अध्यक्षता है
भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह भारत की BRICS की चौथी अध्यक्षता है। इस वर्ष भारत की BRICS अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है, जिसमें विकास, स्थिरता, नवाचार और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं पर जोर दिया गया है।
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