रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार सुबह भारत पहुंचे। नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उनका भारतीय अधिकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने एयरपोर्ट पर रूसी राष्ट्रपति की अगवानी की। भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक होगी। इस बातचीत में दोनों नेता रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर होगी नजर

मोदी और पुतिन की पिछली मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में हुए SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों के विभिन्न पहलुओं, जिसमें रक्षा, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, अंतरिक्ष और आपसी संपर्क शामिल हैं, की समीक्षा की थी। अब दिल्ली में होने वाली बैठक में रक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। ब्रह्मोस मिसाइल के आधुनिकीकरण, रूस से S-400 प्रणाली की शेष आपूर्ति और Su-57 लड़ाकू विमान से जुड़े प्रस्तावों पर बातचीत हो सकती है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, भारत में नए सिविल न्यूक्लियर प्रोजेक्ट और ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

BRICS बिजनेस फोरम में शामिल होंगे पुतिन

BRICS सम्मेलन के अलावा रूसी राष्ट्रपति बिजनेस फोरम के कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे। वह BRICS बिजनेस फोरम के प्लेनरी सत्र को संबोधित करेंगे। भारत और रूस के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी चर्चा हो सकती है। सम्मेलन के दौरान पुतिन कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।

7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग

BRICS 2026 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात भी एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम होगी। शी जिनपिंग 12 सितंबर को भारत पहुंचेंगे। करीब 7 साल बाद हो रहे इस दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इस बातचीत में भारत-चीन व्यापार संबंधों, सीमा से जुड़े मुद्दों और आपसी सहयोग को लेकर चर्चा हो सकती है।

ईरान के राष्ट्रपति से भी मोदी की बातचीत संभव

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ भी मुलाकात होने की संभावना है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे इस बातचीत में अहम हो सकते हैं। ईरान के BRICS में शामिल होने के बाद संगठन की भूमिका पश्चिम एशिया से जुड़े मामलों में भी बढ़ी है। ऐसे में भारत के लिए ईरान के साथ संतुलित और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।