शिक्षक दिवस के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति ने नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में देशभर के शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता को देश के विकास की आधारशिला बताया और शिक्षकों के योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा हमारे संविधान में निहित ‘अवसर की समानता’ के आदर्श को व्यवहार में लागू करने का सबसे प्रभावी माध्यम है, उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई बीच में छोड़ने की दर का नगण्य स्तर तक पहुंचना शिक्षकों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, उन्होंने इस उपलब्धि के लिए देश के सभी शिक्षकों की प्रशंसा की।
स्कूली शिक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव
राष्ट्रपति ने कहा कि स्कूली शिक्षा पूरी शिक्षा व्यवस्था का आधार है। ज्ञान और कौशल जीवन के किसी भी चरण में हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन बचपन में सदाचार और नैतिक मूल्यों की शिक्षा अधिक प्रभावी होती है, उन्होंने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर गंभीरता से ध्यान देकर शिक्षक अच्छे विद्यार्थियों के साथ-साथ कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों की भावी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं।
हर विद्यार्थी में आत्मविश्वास जगाना शिक्षकों का दायित्व
राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थियों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि अलग-अलग होती है। अनेक विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, जबकि कुछ अपने परिवार की पहली पीढ़ी के विद्यार्थी होते हैं। कुछ विद्यार्थी गांव के सामान्य स्कूल से शहर के बड़े स्कूल में पहुंचते हैं, तो कुछ स्वभाव से संकोची होते हैं, उन्होंने कहा कि कई बार प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में भी आत्मविश्वास की कमी होती है। वहीं कुछ विद्यार्थियों को विशेष जरूरतों के कारण अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होती है। ऐसे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा करना, उनकी क्षमताओं को पहचानना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
ज्ञान की महाशक्ति और कौशल-केंद्र बने भारत
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के विकास में शैक्षणिक उत्कृष्टता, कौशल विकास और उद्यमिता का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, उन्होंने कहा कि भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने के साथ-साथ दुनिया के प्रमुख कौशल-केंद्र के रूप में स्थापित करना देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल है, उन्होंने कहा कि देशवासी विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था आवश्यक है।
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शिक्षकों को बताया शिक्षा व्यवस्था की प्राण-वायु
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में प्राण-वायु का संचार करते हैं। देश का प्रयास होना चाहिए कि कोई भी विद्यार्थी अच्छी शिक्षा के अवसर से वंचित न रहे, उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने स्नेह, समर्पण और संवेदनशीलता के माध्यम से विद्यार्थियों में ज्ञान, प्रेरणा, नैतिकता और संवेदनशीलता का विकास करें, उन्होंने कहा कि शिक्षकों का समर्पण ही देश की भावी पीढ़ी को मजबूत बनाने और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Written By: M. Atharuddin Munne Bharti
Edited By : Toshi Shah