Lucknow Link Expressway: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का नेटवर्क लगातार फैल रहा है और अब इसी कड़ी में लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे एक अहम कड़ी बनने जा रहा है। करीब 51 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तरफ से आने वाले ट्रैफिक को सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंचाने की योजना है।

इसका सबसे बड़ा फायदा उन वाहनों को होगा जिन्हें अभी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल की तरफ जाने के लिए लखनऊ शहर के भीतर से गुजरना पड़ता है। नया रास्ता तैयार होने के बाद दिल्ली-NCR, नोएडा, आगरा और मथुरा की तरफ से आने वाला ट्रैफिक बिना शहर में घुसे सीधे पूर्वांचल की ओर निकल सकेगा।
यानी एक तरफ पश्चिमी यूपी और दिल्ली से कनेक्टिविटी बेहतर होगी, तो दूसरी तरफ अयोध्या, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर और आगे बिहार की तरफ जाने वाले रास्ते को भी रफ्तार मिलेगी।

लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे कहां से कहां तक बनेगा?

इस प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी UPEIDA की देखरेख में तैयार किया जा रहा है। यह करीब 51 किलोमीटर लंबा और 6 लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा। जरूरत के मुताबिक इसे भविष्य में 8 लेन तक बढ़ाने की व्यवस्था भी रखी गई है।इसका एक सिरा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जबकि दूसरा सिरा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर चांद सराय/गोसाईंगंज क्षेत्र में कनेक्ट होगा।प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 4,775-4,776 करोड़ रुपये बताई गई है और इसके निर्माण को लगभग तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे की खास बातें

  • लंबाई: करीब 51 किलोमीटर
  • शुरुआत: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की तरफ
  • कनेक्शन: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
  • चौड़ाई: 6 लेन
  • भविष्य में: 8 लेन तक विस्तार की क्षमता
  • अनुमानित लागत: करीब 4,776 करोड़ रुपये
  • डिजाइन स्पीड: करीब 120 किमी प्रति घंटा

दिल्ली से पूर्वांचल जाने वालों को सबसे बड़ा फायदा

अभी दिल्ली या नोएडा से पूर्वांचल की तरफ जाने वाले वाहन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से उतरकर लखनऊ के रास्तों से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की तरफ जाते हैं। इस दौरान शहर के ट्रैफिक और दूसरे इंटरचेंज के कारण समय बढ़ जाता है।लिंक एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद यही ट्रैफिक लखनऊ के बाहरी हिस्से से सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर पहुंच सकेगा।इसका मतलब है कि दिल्ली-NCR → नोएडा → यमुना एक्सप्रेसवे → आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे → लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे → पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए एक लंबा हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार हो जाएगा।आगे इसी रास्ते से अयोध्या, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचना आसान होगा। बिहार की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को भी इसका फायदा मिल सकता है।

लखनऊ शहर में भी घट सकता है ट्रैफिक का दबाव

इस प्रोजेक्ट का फायदा सिर्फ एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। बड़ी संख्या में भारी वाहनों के लखनऊ शहर के अंदर आने की जरूरत कम होने से शहर की सड़कों पर दबाव घटने की उम्मीद है।खासकर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच चलने वाले ट्रकों को अगर शहर के अंदर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है, तो इससे जाम और प्रदूषण दोनों पर असर पड़ सकता है।हालांकि वास्तविक समय की बचत और ट्रैफिक में कमी एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद ट्रैफिक पैटर्न पर निर्भर करेगी।

आगरा-मथुरा से लेकर अयोध्या-गाजीपुर तक जुड़ जाएगा नेटवर्क

लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे की खासियत इसकी लंबाई से ज्यादा इसके कनेक्शन में है।आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा और मथुरा की दिशा से आने वाला ट्रैफिक इस नेटवर्क में शामिल होगा। यमुना एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहन आगे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के रास्ते इस लिंक तक पहुंच सकेंगे।दूसरी तरफ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद यही कॉरिडोर अयोध्या, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर जैसे इलाकों की ओर जाने का रास्ता खोलेगा।आगे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के नेटवर्क के जरिए गोरखपुर और नेपाल सीमा की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को भी कनेक्टिविटी मिल सकती है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से भी मिलेगा कनेक्शन

लिंक एक्सप्रेसवे को सिर्फ आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच का रास्ता समझना सही नहीं होगा। इसका कनेक्शन लखनऊ के दूसरे प्रमुख हाईस्पीड कॉरिडोर से भी जुड़ने की योजना है।लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे और आउटर रिंग रोड के आसपास के इंटरचेंज से जुड़ाव बनने पर कानपुर और लखनऊ की तरफ से आने वाला ट्रैफिक भी इस बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क में शामिल हो सकेगा।इसका असर खासकर माल ढुलाई पर पड़ सकता है। पश्चिमी यूपी के औद्योगिक और कारोबारी इलाकों से पूर्वांचल की ओर सामान पहुंचाने में सड़क संपर्क पहले के मुकाबले अधिक सीधा हो सकता है।

किसानों और कारोबारियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद

बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का असर सिर्फ यात्रियों पर नहीं पड़ता। ग्रामीण इलाकों से आने वाले फल, सब्जियां और दूसरे कृषि उत्पाद बड़े बाजारों तक जल्दी पहुंच सकें, तो परिवहन लागत और समय दोनों में फायदा हो सकता है।लखनऊ के बाहरी इलाकों में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और दूसरे कारोबारी प्रोजेक्ट भी बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से आकर्षित हो सकते हैं। इससे काकोरी, मोहनलालगंज, सरोजनीनगर और आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

यूपी में सिर्फ लखनऊ लिंक ही नहीं, कई और लिंक एक्सप्रेसवे

उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क अब सिर्फ लंबी दूरी के बड़े एक्सप्रेसवे तक सीमित नहीं है। अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ने के लिए कई लिंक प्रोजेक्ट भी तैयार किए जा रहे हैं।गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पहले ही गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ चुका है। इसके अलावा फर्रुखाबाद, जेवर, झांसी और चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे जैसी योजनाएं भी अलग-अलग चरणों में हैं।इसी तरह बलिया-मांझी घाट लिंक, विंध्य-पूर्वांचल लिंक और मेरठ-हरिद्वार लिंक जैसी योजनाएं पूरी होने पर यूपी के एक्सप्रेसवे नेटवर्क की पहुंच और ज्यादा क्षेत्रों तक हो सकती है।

असली बदलाव तब दिखेगा जब पूरा नेटवर्क जुड़ेगा

लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे की अहमियत अकेले 51 किलोमीटर की सड़क में नहीं है। इसकी असली ताकत तब सामने आएगी, जब यह आगरा-लखनऊ, यमुना, लखनऊ-कानपुर और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसे दूसरे कॉरिडोर के साथ पूरी तरह जुड़कर काम करेगा।तब दिल्ली-NCR से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की दिशा में जाने वाले ट्रैफिक के लिए एक ऐसा हाईस्पीड नेटवर्क तैयार होगा, जिसमें लखनऊ शहर को पार किए बिना लंबी दूरी तय करना संभव होगा।