Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Station: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट इन दिनों अच्छा खासा सुर्खियां बटौर रहा है। वजह भी साफ है क्योंकि यह भारत के सबसे बड़े हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में शामिल है। इस स्टेशन की खासियत यह है कि इसका स्टेशन जमीन के बजाय हवा में बना है, चौंकिए मत दरअसल हाई-स्पीड रेल परियोजना के तहत अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का यह स्टेशन जमीन से 12 मीटर ऊपर बनेगा. इसमें बसे ज्यादा काम इसकी मजबूती और असकी खूबरती को लेकर की जा रही है। जिससे बुलेट ट्रेन में सफर करने वाले लोगों को बेहतर अनुभव के साथ-साथ कॉरिडोर के आसपास हरियाली देखने को मिले।
थाने स्टेशन पर दिया है खास ध्यान
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत इस कॉरिडोर की लंबाई 508 किलोमीटर की रहेगी। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र,गुजरात से होते हुए दादरा व नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इस कॉरिडोर के तहत थाने स्टेशन को सबसे ज्यादा खास बनाने पर जोर दिया जाएगा। इस स्टेशन को मैंग्रोव के पेड़ों से हरा भरा दिखेगा। इतना ही नहीं इस पूरे कॉरिडोर में पेड़ों की हरियाली आंखों को सुकून देगी।
मैंग्रोव को लेकर हुई चिंता
दरअसल मुंबई में थाने का इलाका पर्यावरण के हिसाब से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां मैंग्रोव के पेड़ पाए जाते हैं, जो समुद्र और नदी के किनारे पर ही उगते हैं। ये पेड़ पर्यावरण के लिए बेहद खास हैं। इस पेड़ में बाढ़ रोकते की क्षमता होती है। साथ ही यह मिट्टी को भी बांधे रखने का काम करते हैं। कई जीव-जंतुओं भी इस पेड़ पर अपना घोसला बनाते हैं। जब यहां बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने की घोषणा हुई, तो इन पेड़ों को लेकर चिंता व्यक्त की गई। क्योंकि बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने का मतलब पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ करना। लेकिन नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने स्टेशन को इस आधार पर डिजाइन किया है जिससे मैंग्रोव को बचाया जा सके।
प्लेटफॉर्म पर पहुंचने वाले यात्रियों को होगा अच्छा महसूस
आज तक हमने और आपने जो भी रेलवे स्टेशन देखे हैं वह जमीन पर ही बने हैं। लेकिन थाने में बन रहे इस बुलेट ट्रेन को अलग अंदाज में बनाया जाएगा। यहां का कॉन्कोर्स लेवल मतलब यात्रियों के टिकट लेने की जगह का भी खास ध्यान रखा गया है। जिससे की यात्रियों को टिकट लेने में सुविधा हो। वहीं इस प्रोजेक्ट के अंदर आराम कक्ष और प्लेटफॉर्म पर पहुंचने वाले यात्रियों को भी अच्छा महसूस होगा। प्राकृतिक जमीन से स्टेशन की ऊंचाई तकरीबन 12 मीटर होगी। इससे नीचे मैंग्रोव सुरक्षित रहेंगे और पानी के बहाव में भी रुकावट नहीं होगी। इस स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि, यह उल्हास नदी के पास बना हुआ है। ऐसे में इसे बनाने के पीछे नदी की लहरों और पानी के बहाव से प्रेरित होकर ही इसकी बनावट को लेकर छत का डिजाइन भी इस तरह से बनाया गया है, जिससे अगर लहरे तेजी से ऊपर आती हैं, तो जल्द ही पानी को नीचे गिरा सकती है। इस डिजाइन के तहत स्टेशन को सुंदर बनाने के साथ-साथ मजबूती पर भी खासा ध्यान दिया जाएगा। इससे लोगों की सुरक्षा का भी दायरा भी इसके तहत लिया गया है।
महाराष्ट्र में 3 एलिवेटेड स्टेशन हुए निर्धारित
महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने के लिए कुल 135.45 किलोमीटर का एलिवेटेड सेक्शन तैयार किया गया है। शिलफाटा से इस कॉरिडोर की शुरूआत होगी और झरोली गांव तक जाएगी। इसके साथ ही इस कॉरिडोर के तहत महाराष्ट्र-गुजरात बॉर्डर भी गुजरेंगे। इस हिस्से में 3 एलिवेटेड स्टेशन थाने,विरार और बोईसर होंगे। बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का ज्यादातर हिस्सा वायडक्ट और पुलों पर बनेगा। लगभग 124 किलोमीटर तक सिर्फ वायडक्ट और ब्रिज होंगे।
7 पहाड़ी सुरंगों से गुजरेगी ट्रेन
इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य जमीन तक ही सिमित नहीं होगा बल्कि पहाड़ों की हसीन वादियों में भी इसके सफर का आनंद ले सकते हैं और यही वजह है कि इसके निर्माण कार्य में अभी देरी आ रही है। इस कॉरिडोर में 7 पहाड़ी सुरंगों का निर्माण होगा। जिसमें से सुरंगे पहले ही ब्रेकथ्रू की जा चुकी हैं। अब इन सुरंगों में ड्रेनेज, वॉटरप्रूफिंग और लाइनिंग का काम तेजी के साथ किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के तहत कई नदियों पर भी इस कॉरिडोर के अंतर्गत कई नदियों पर भी बड़े पुल का निर्माण होगा। जिनपर से बुलेट ट्रेन रफ्तार पकड़ेगी। उल्हास नदी पर 460 मीटर लंबा पुल,वैतरणा नदी पर 2.32 किलोमीटर लंबा पुल और जगानी नदी पर 510 मीटर लंबे पुल का निर्माण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत किल 36 ब्रिज और क्रॉसिंग हैं। इसमें 12 स्टील ब्रिज मुख्य रेलवे लाइन पर हाईवे और नदियों पर बनाए जा रहे हैं।
100 किलोमीटर में बनेंगे पियर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के निर्माण की रफ्तार जितनी तेज है, उतना ही तेजी से महाराष्ट्र क्षेत्र में 100 किलोमीटर से ज्यादा जगह पियर बनाने की प्रक्रिया तेज होगी। अभी तक 74 किलोमीटर के पियर पूरे हो गए हैं और वियाडक्ट गर्डर रखने के लिए तैयार हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट सिर्फ रेल यात्रा नहीं है बल्कि बड़े निर्माण के साथ पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए ज्यादा ध्यान दिया गया है। इतना ही नहीं थाने स्टेशन पर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रकृति एक साथ चलेगी। यह स्टेशन तैयार होगा तो यात्री न सिर्फ तेज ट्रेन का आनंद लेंगे बल्कि ऐसे स्टेशन में कदम रखेंगे जो मैंग्रोव की हरियाली के साथ-साथ नदी की लहरों का भी मजा देगा। बुलेट ट्रेन से मुंबई और अहमदाबाद का सफर चंद घंटों में पूरा हो जाएगा। यह स्टेशन देशभर में अपने आप में ही बेहद खास बनेगा।
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