राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 से पूर्व ‘खेलो इंडिया संवाद आयोजन में खेल की बात,प्रधानमंत्री के साथ’ में पीएम मोदी ने युवाओं और खिलाड़ियों से संवाद किया। कार्यक्रम में खेल विकास,युवा नेतृत्व, फिटनेस और राष्ट्र निर्माण जैसे मुद्दों पर चर्चा की। कार्यक्रम के शुरु होने से पूर्व केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि, PM मोदी जी आपने युवाओं को भारत का उज्जवल भविष्य माना और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का काम किया है। आपके नेतृत्व में देश ने पहली बार खेल को केवल एक एक्टिविटी नहीं बल्कि नेशनल प्राथमिकता के रूप में देखा है। इसी विजन को मैदान पर मजबूती देने के लिए आपने 2023 में माई भारत जैसे पावरफुल प्लेफॉर्म की शुरुआत की। देशभर 2 करोड़ 66 लाख से अधिक युवा इससे जुड़ चुके हैं और करियर के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।
मां भारती की महान संतान थे मेजर ध्यानचंद
कार्यक्रम की शुरुआत होते ही पीएम ने कहा कि, आज इस कार्यक्रम में देशभर के एथलीट और खेल जगत के मानभावी हम सबके साथ शामिल हुए हैं। आप सबको पता है कि 2 दिन बाद 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस हैा मैं आप सभी को इस राष्ट्रीय खेल दिवस की शुमकामनाएं देता हूं। ये दिन मां भारती की एक महान संतान मेजर ध्यानचंद जी को याद करने का भी अवसर होता है। 100 वर्ष पहले भारतीय सेना की हॉकी टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर गई थी और उस टीम में मेजर ध्यानचंद भी थे। वो दूर भारत और न्यूजीलैंड के खेल संबंध के 100 वर्ष पूरे होने का आधार है.
जो खेले वो खिले
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि, इस 15 अगस्त को लाल किले से भारत का खेल विजन देश के सामने रखा है। जब मैं खेल की बात करता हूं। तो ये केवल मेडल जीतने तक सीमित नहीं है। ये विकसित भारत के निर्माण में भारत की खेलशक्ति और युवाशक्ति को एक साथ जोड़ने का अभियान है। जो खेले वो खिले और खेल में खिलना सिर्फ मैदान में जीतना नहीं है। खेल में खिलना मतलब व्यक्ति का खिलना और परिवार का खिलना और देश का गौरव बढ़ाना। जब कोई खिलाड़ी सफल होता है तब वो सफलता केवल उसकी नहीं होती है बल्कि उसकी सफलता से उसके परिवार की पहचान बढ़ती है स्कूल और कॉलेज की प्रतिष्ठा बढ़ती है, जिले और राज्य की पहचान और मजबूत होती है। दुनिया उस खिलाड़ी के नाम से उस शहर या राज्य को पहचानने लगता है।
2012 के ओलंपिक्स में भारत ने सिर्फ 13 खेलों में हिस्सा लिया
इस बार लाल किले से मैंने खेलों से जुड़ी एक बहुत बड़ी चुनौती की तरफ भी देश का ध्यान दिलाया है। ये चुनौती ओलंपिक से जुड़ी हुई है। ओलंपिक्स में जितने अलग-अलग खेल होते हैं। भारत की टीमें उसमें से आधे स्पोर्ट्स में हिस्सा ही नहीं लेती। यानि मेडल टैली के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए तो हम कंपीट ही नहीं करते और दशकों से ऐसा ही चला आ रहा है। 2012 के ओलंपिक्स में भारत ने सिर्फ 13 खेलों में हिस्सा लिया था। 20 से ज्यादा खेलों में तो भारत की भागीदारी ही नहीं थी और इनमें से कई सारे खेल तो ऐसे हैं। जिनका नाम तक देश के लोगों ने शायद ही सुना हो। दुनिया के दूसरे देश उन खेलों में मेडल जीतते हैं और हम उनमें हिस्सा ही नहीं लेते। हमें मेडल टैली बढ़ाने के लिए इन खेलों में भी महारत हासिल करनी ही होगी।
5 साल की उम्र से 15 साल की उम्र खिलाड़ियों की पहचान
जब हम 2036 ओलंपिक की तैयारी की बात करते हैं तो हमारा फोकस ये होना चाहिए कि हमें आज से ही वो खिलाड़ी तैयार करने हैं जो 2036 अलग-अलग क्वलिफाई और कंपीट करेंगे और इसलिए लाल किले से मैंने 5 साल की उम्र से 15 साल की उम्र खिलाड़ियों की पहचान करने के लिए एक प्रतिभा खोज अभियान का ऐलान किया है औऱ इसमें हमें केवल ये नहीं देखना है कि किस बच्चे में किसमें रूचि है बल्कि ये भी देखना है कि कौन सा बच्चा किस खेल के लिए फिट है। हमें उस हिसाब से बच्चों को ट्रेनिंग देनी होगी। मैं सभी को भरोसा देता हूं कि इसके लिए सरकार के तरफ से जो भी मदद चाहिए सरकार उसमें आपके साथ कंधे से कंधा मिलकर चलेगी।
खेल को लेकर सरकार कितनी गंभीर
पीएम ने कहा, हमारी सरकार भारत में 21वीं सदी का आधुनिक खेल इकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज खेल विश्वविद्यालय से लेकर आधुनिक ट्रेनिग सेंटर्स तक देश में एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसमें प्रतिभा को पहचानने से लेकर उसे दुनिया के मंच तक पहुंचाने तक हर स्तर पर सहयोग मिले। हम दुनिया के दूसरे देशों के साथ भी खेल विज्ञान,प्रशिक्षण,कोचिंग और अनुभव साझा करने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं। खेल को लेकर सरकार कितनी गंभीर है, ये आयोजन भी इसका उदाहरण है। खेलो इंडिया संवाद सिर्फ खेल की बात करने का कार्यक्रम नहीं है,ये एक ऐसे संवाद का मंच है। जिसका एक-एक विचार देश के खेल विजन को नई दिशा दे सकता है और इसके साथ जो युवा संवाद हो रहा है, वो कार्यक्रम आपके विचार और आकांक्षाओं को देश के सपनों से जोड़ने का बहुत बड़ा माध्यम है। हम अक्सर सुनते हैं कि एक स्वस्थ समाज के लिए,एक अच्छी पारिवारिक व्यवस्था के लिए,एक बेहतर कार्य संस्कृति के लिए खिलाड़ी की भावना बहुत जरूरी होती है और ये आत्मा खेल के मैदान में गए बिना सीखनी बहुत मुश्किल होती है। खेल हमें केवल चैंपियन बनना नहीं सिखाता,बल्कि खेल हमें एक बेहतर प्रतिस्पर्धी बनना भी सिखाता है।
शीतल ने पैरालंपिक में मेडल जीता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- खेल से कैसे आपकी ज़िंदगी बदल सकते हैं,इसका एक बड़ा उदाहरण हमारे पैरा-एथलीट हैं। जब वे कुछ हासिल करते हैं,तो उनके पूरे परिवार को भी एक नई ज़िंदगी मिलती है। मैं भी ऐसे एथलीटों से प्रेरित होता हूं। शीतल ने पैरालंपिक में मेडल जीता,तो पूरा जम्मू और भारत खुश हुआ। हमारी एक और बेटी, अवनी लेखरा ने दो ओलंपिक मेडल जीते हैं। जब भी मैं उनसे मिलता हूँ,मुझे गर्व महसूस होता है। सुमित अंतिल हों या झंडू कुमार, वे सभी हमें प्रेरित करते हैं। खेल बेहतर ज़िंदगी की गारंटी हैं। खेल से एक बहुत बड़ा फायदा होता है जो असली खिलाड़ी होते हैं उनमें ड्रग्स, नशे से दूर रहने की इच्छाशक्ति भी पैदा हो जाती है।
यह भी पढ़ें: Share Market Update: क्रूड ऑयल की गिरावट से बिगड़ा बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान