Critical Mineral Processing Scheme: भारत को ऊर्जा और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए कैपेक्स सपोर्ट स्कीम' को मंजूरी दे दी है। इस योजना पर अगले पांच वर्षों में 2,814 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत देश में लिथियम और निकेल के प्रसंस्करण के लिए चार नए औद्योगिक प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
लिथियम और निकेल के लिए स्थापित होंगे चार प्लांट
केंद्र सरकार की इस योजना का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित करना है। इसके तहत दो लिथियम प्रोसेसिंग प्लांट और दो निकेल प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे। योजना के अनुसार, प्रत्येक लिथियम प्लांट की न्यूनतम क्षमता 30 हजार टन और प्रत्येक निकेल प्लांट की न्यूनतम क्षमता 50 हजार टन होगी। निकेल के उत्पादन के दौरान कोबाल्ट को भी उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त करने की उम्मीद है। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और विशेष इस्पात जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है।
निवेश पर मिलेगी 30 फीसदी सब्सिडी
योजना के तहत पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। हालांकि, प्रत्येक लाभार्थी के लिए सहायता की अधिकतम सीमा तय की गई है।
लिथियम प्लांट: प्रति लाभार्थी अधिकतम 500 करोड़ रुपये।
निकेल प्लांट: प्रति लाभार्थी अधिकतम 900 करोड़ रुपये।
कुल वित्तीय परिव्यय: 2,814 करोड़ रुपये।
योजना की अवधि: वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक।
लाभार्थियों का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में तकनीकी योग्यता का मूल्यांकन होगा। इसके बाद योग्य आवेदक दूसरे चरण में वित्तीय बोली लगा सकेंगे। प्रत्येक खनिज के लिए दो लाभार्थियों का चयन सबसे कम पूंजीगत सहायता मांगने वाली बोली के आधार पर किया जाएगा।
तीन चरणों में मिलेगा आर्थिक प्रोत्साहन
सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता एक साथ नहीं दी जाएगी। इसके लिए तीन चरण निर्धारित किए गए हैं। निर्धारित लक्ष्यों और परियोजना की प्रगति से जुड़े माइलस्टोन पूरे होने पर प्रोत्साहन राशि जारी की जाएगी। इस व्यवस्था से परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और निवेश के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
चीन समेत विदेशी बाजारों पर निर्भरता होगी कम
फिलहाल लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण का काम दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित है। भारत भी रिफाइंड खनिजों और उच्च शुद्धता वाली सामग्री के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। सरकार के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय तनाव, कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति पर प्रतिबंध जैसी परिस्थितियां भारत की औद्योगिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती हैं। घरेलू स्तर पर प्रोसेसिंग प्लांट विकसित होने से देश में ही खनिजों का मूल्य संवर्धन संभव होगा और आयात पर निर्भरता घटेगी।
EV, बैटरी और रक्षा क्षेत्र को मिलेगा फायदा
इस योजना से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और स्पेशियलिटी स्टील जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण के लिए जरूरी बैटरियों के निर्माण में महत्वपूर्ण खनिजों की अहम भूमिका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर योजना की जानकारी देते हुए कहा कि भारत अपने भविष्य की तकनीकों को विकसित करने के लिए जरूरी खनिजों के प्रसंस्करण में दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि लिथियम, निकेल और कोबाल्ट इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी हैं।
Do you feel India should depend on other countries for processing the critical minerals that power our future? I certainly don’t! Lithium, nickel, cobalt…these are essential for EVs, batteries, electronics and defence. Yet, we remain heavily dependent on imports of refined materials. To address this, the Cabinet has approved a scheme to change this. Key highlights: New critical mineral processing plants. Capital subsidy to boost investment. Greater domestic value addition. Stronger supply chains. The principle is clear...India must have capabilities to build technologies of the future! https://t.co/deencvjivt
— Narendra Modi (@narendramodi) November 4, 2026
केंद्र सरकार के मुताबिक, यह योजना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ महत्वपूर्ण खनिजों की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करेगी। इससे भारत को भविष्य की तकनीकों और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।