ओडिशा: ओडिशा के कोरापुट स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपना 2000वां एयरो-इंजन रक्षा बलों को सौंप दिया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम में भाग लिया और इसे भारत की एयरोस्पेस यात्रा का महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को रक्षा के लिए अहम बताया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भारत की एयरोस्पेस यात्रा में एक अहम पड़ाव बताया और MSME, स्टार्ट-अप, इंडस्ट्री, एकेडेमिया एवं रिसर्च संस्थानों को शामिल करते हुए एक मज़बूत स्वदेशी एयरोस्पेस प्रोपल्शन इकोसिस्टम बनाने पर ज़ोर दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्नत एयरो-इंजन तकनीक में आत्मनिर्भरता भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र को नई मजबूती प्रदान करेगी। इसके साथ ही उन्होंने स्वदेशी डिजाइन, विकास, परीक्षण, निर्माण एवं रखरखाव क्षमताओं को और मजबूत करने का आह्वान किया।
वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों की सराहना की
राजनाथ सिंह ने HAL कोरापुट के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि 2000 इंजनों का निर्माण केवल एक संख्या नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को मजबूत करने वाली 2000 महत्वपूर्ण उपलब्धियों का प्रतीक है। HAL कोरापुट की स्थापना वर्ष 1964 में हुई थी और तब से यह देश की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
रक्षा उपकरणों के लिए 335 करोड़ रुपये का निवेश
उन्होंने बताया कि HAL कोरापुट द्वारा निर्मित इंजन मिग-21, मिग-27, मिग-29 और सुखोई-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों को शक्ति प्रदान करते रहे हैं। इसके अलावा, अब तक 9,000 से अधिक इंजनों का ओवरहॉल भी किया जा चुका है, जिससे रक्षा उपकरणों की सेवा अवधि बढ़ाने में मदद मिली है। इस दौरान उन्होंने AL-31FP इंजन की उत्पादन क्षमता को 30 से बढ़ाकर 50 इंजन प्रतिवर्ष करने की घोषणा की। इसके लिए लगभग 335 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
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