नई दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने चीन को लेकर मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने पड़ोसी देश पर "खतरनाक स्तर की आर्थिक निर्भरता" बढ़ने दी है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई सवाल पूछे।

प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को BRICS Summit के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।

भारत चार सवालों के जवाब का इंतजार कर रहा है

जयराम रमेश ने कहा, "अब जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय बैठक समाप्त हो चुकी है, तो भारत लगातार चार सवालों के जवाब का इंतजार कर रहा है।"

उन्होंने सवाल किया कि "सीमा पर चीन की घुसपैठ और ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका को लेकर भारत की स्थिति कमजोर क्यों हुई, जबकि चीन पर आर्थिक निर्भरता खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है?"

सीमा विवाद पर प्रधानमंत्री मोदी का चीन को "क्लीन चिट"

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि गलवान संघर्ष के बाद जून 2020 में सीमा विवाद को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को "क्लीन चिट" दे दी थी।

उन्होंने दावा किया कि पूर्वी लद्दाख के बड़े हिस्सों में भारत के पारंपरिक गश्त और चराई के अधिकार धीरे-धीरे खत्म हो गए हैं।

जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन वहां भारतीय गश्ती क्षेत्रों तक पहुंच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है और सीमा विवाद को लेकर उसका रुख और सख्त हुआ है।

ब्रह्मपुत्र नदी पर मेदोग मेगा डैम परियोजना चिंता का विषय  

उन्होंने कहा कि चीन द्वारा जगहों के नाम बदलना, "दक्षिण तिब्बत" के रूप में अरुणाचल प्रदेश पर दावा करना और ब्रह्मपुत्र नदी पर मेदोग मेगा डैम परियोजना आगे बढ़ाना चिंता का विषय है।

कांग्रेस नेता ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन के समर्थन के मुद्दे पर भी सरकार से सवाल किया।

उन्होंने भारत-चीन व्यापार घाटे का जिक्र करते हुए कहा कि 2025-26 में यह रिकॉर्ड 112.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिससे खासकर MSME क्षेत्र प्रभावित हुआ।

चीन पर भारत की निर्भरता बढ़ गई है

जयराम रमेश ने कहा कि महत्वपूर्ण कच्चे माल, मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स और इंटरमीडिएट उत्पादों के लिए चीन पर भारत की निर्भरता बढ़ गई है।

उन्होंने सवाल किया, "मेक इन इंडिया और इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना एक ही सिक्के के दो पहलू बन गए हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार का रोडमैप कहां है?"

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत और चीन के संबंधों को सामान्य बनाना अलग बात है, लेकिन सरकार की ओर से जो दिखाई दे रहा है वह "कैलिब्रेटेड सरेंडर" जैसा है।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS Summit के दौरान हुई बैठक में भारत-चीन सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताई थी।

दोनों नेताओं ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि "मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए" और भारत-चीन संबंधों को "पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित" के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

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