नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने के साथ ही एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI की चर्चा तेज हो जाती है। कभी AQI 200 के पार पहुंचता है, तो कभी 300 और 400 का आंकड़ा भी पार कर जाता है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर AQI 300 होने पर क्या होता है? क्या स्कूल बंद हो जाते हैं? क्या गाड़ियों पर रोक लग जाती है? क्या निर्माण कार्य भी बंद करना पड़ता है?

दरअसल, दिल्ली-NCR में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है। इसके तहत हवा की गुणवत्ता खराब होने पर अलग-अलग चरणों में कदम उठाए जाते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि AQI बढ़ने पर आम लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ सकता है।

AQI 300 होने का क्या मतलब है?

AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर को बताता है। इसके जरिए पता चलता है कि हवा कितनी साफ है और उसमें सांस लेना सेहत के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, AQI को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। 0 से 50 तक का AQI अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर श्रेणी में आता है।

यानी AQI 300 होने पर हवा खराब श्रेणी में होती है। जैसे ही यह 301 तक पहुंचता है, हवा बहुत खराब श्रेणी में आ जाती है। इस स्तर पर सांस से जुड़ी परेशानी वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।

AQI बढ़ने पर GRAP कैसे काम करता है?

GRAP को प्रदूषण के स्तर के हिसाब से चार चरणों में बांटा गया है। हर चरण में पहले से लागू उपाय जारी रहते हैं और जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त पाबंदियां लगाई जाती हैं।

* स्टेज-1: AQI 201 से 300 तक, यानी खराब हवा।
* स्टेज-2: AQI 301 से 400 तक, यानी बहुत खराब हवा।
* स्टेज-3: AQI 401 से 450 तक, यानी गंभीर हवा।
* स्टेज-4: AQI 450 से ऊपर, यानी गंभीर से भी ज्यादा खराब स्थिति।

ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी चरण की पाबंदियां लागू करने का फैसला संबंधित अधिकारियों की समीक्षा और आधिकारिक आदेश के आधार पर होता है। सिर्फ AQI का आंकड़ा देखकर यह नहीं मान लेना चाहिए कि सभी प्रतिबंध अपने आप लागू हो गए हैं। आधिकारिक जानकारी के लिए CAQM की वेबसाइट देखना जरूरी है।

AQI 300 होने पर किन चीजों पर पड़ता है असर?

1. निर्माण कार्य और सड़क की धूल पर सख्ती

प्रदूषण बढ़ने पर निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करना जरूरी हो जाता है। GRAP के पहले चरण में निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल रोकने के उपाय, सड़कों की मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव जैसे कदम शामिल हैं।

इसके अलावा निर्माण से निकलने वाले मलबे को खुले में छोड़ने और कचरा जलाने पर रोक लगाने के नियमों का पालन कराया जाता है। अगर प्रदूषण और बढ़ता है, तो अगले चरणों में कुछ निर्माण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

2. गाड़ियों को लेकर क्या बदलता है?

प्रदूषण बढ़ने पर वाहनों से निकलने वाले धुएं को कम करने के लिए भी कदम उठाए जाते हैं। पहले चरण में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे उपाय किए जा सकते हैं।

हालांकि, AQI 300 होने भर से दिल्ली में सभी निजी गाड़ियों पर प्रतिबंध नहीं लग जाता। BS-III या BS-IV वाहनों, ट्रकों और दूसरे वाहनों पर लागू होने वाली पाबंदियां संबंधित GRAP चरण, वाहन के प्रकार और जारी सरकारी आदेश पर निर्भर करती हैं। इसलिए गाड़ी लेकर निकलने से पहले दिल्ली सरकार और CAQM के ताजा निर्देश देखना बेहतर है।

3. स्कूलों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ता है?

प्रदूषण का असर बच्चों की सेहत पर पड़ सकता है। इसी वजह से हवा की गुणवत्ता ज्यादा खराब होने पर स्कूलों में पढ़ाई के तरीके को लेकर प्रशासन फैसला ले सकता है।

GRAP के तीसरे चरण में पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए हाइब्रिड मोड में पढ़ाई का प्रावधान है, जहां लागू हो और संबंधित आदेश जारी किया जाए। हाइब्रिड मोड का मतलब है कि पढ़ाई ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से हो सकती है। हालांकि, AQI 300 होते ही स्कूल बंद होने का कोई सामान्य नियम नहीं है। स्कूलों की छुट्टी, ऑनलाइन कक्षाओं और अन्य व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन के ताजा आदेश देखना जरूरी है।

4. दफ्तर जाने वालों पर भी पड़ सकता है असर

प्रदूषण बढ़ने पर लोगों को निजी गाड़ियों की जगह सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। GRAP के दूसरे चरण में सार्वजनिक कार्यालयों और नगर निकायों के कामकाज के समय में बदलाव जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।

कुछ परिस्थितियों में पार्किंग शुल्क बढ़ाकर निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, ये उपाय लागू होने की स्थिति संबंधित आदेश पर निर्भर करती है।

प्रदूषण बढ़ने पर खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

AQI खराब होने पर सिर्फ सरकारी पाबंदियों पर निर्भर रहना काफी नहीं है। लोगों को भी अपनी दिनचर्या में कुछ बदलाव करने चाहिए।

* हवा की गुणवत्ता ज्यादा खराब होने पर सुबह और शाम की आउटडोर एक्सरसाइज कम करें।
* बच्चों, बुजुर्गों और सांस की परेशानी वाले लोगों को प्रदूषित हवा में ज्यादा देर रहने से बचाएं।
* जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 या समकक्ष मास्क इस्तेमाल करें।
* घर के आसपास कचरा या पत्तियां न जलाएं।
* बाहर निकलने से पहले अपने इलाके का AQI और लागू सरकारी निर्देश जांच लें।

दिल्ली-NCR में AQI 300 पार करना हवा की गुणवत्ता खराब होने का संकेत है, लेकिन इससे हर तरह की पाबंदी अपने आप लागू नहीं हो जाती। AQI 301 से हवा बहुत खराब श्रेणी में पहुंचती है, जबकि GRAP के अलग-अलग चरणों में निर्माण कार्य, वाहनों, स्कूलों और दफ्तरों को लेकर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।

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