नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को सरकार के प्रमुख के तौर पर अपने 25 साल पूरे कर लिए। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुआ यह सफर 2014 में देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा और अब इसका अगला बड़ा लक्ष्य ‘Viksit Bharat 2047’ के रूप में सामने है। इन 25 वर्षों में सिर्फ पद और सरकार का स्तर नहीं बदला, बल्कि विकास को लेकर मोदी की राजनीतिक और प्रशासनिक भाषा भी लगातार बदलती रही।
शुरुआत में फोकस गुजरात में प्रशासन और विकास की व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने पर था। इसके बाद यही सोच राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची। SWAGAT से शुरू हुआ technology-based governance का प्रयोग PRAGATI तक पहुंचा। फिर जनधन, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कार्यक्रमों के जरिए विकास को आम लोगों के जीवन से जोड़ने की कोशिश हुई। आगे चलकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ और अब ‘Viksit Bharat 2047’ इस विकास कथा के बड़े हिस्से बन गए।
तो आखिर इन 25 वर्षों में विकास की यह कहानी कैसे बदली? समझिए पूरी timeline।
2001: गुजरात से शुरू हुई कहानी
नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पद संभाला। उस समय सामने सबसे बड़ी चुनौती थी राज्य में प्रशासन को मजबूत करना और विकास की गति बढ़ाना।
गुजरात में उनके कार्यकाल के दौरान सड़क, बिजली, पानी, निवेश और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दे विकास की राजनीति के केंद्र में रहे। इसी दौर में सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।
इसी सोच से अप्रैल 2003 में SWAGAT यानी State Wide Attention on Grievances by Application of Technology की शुरुआत हुई। इसका मकसद तकनीक के जरिए आम लोगों की शिकायतों को सीधे प्रशासन तक पहुंचाना और उनका समयबद्ध समाधान करना था।
SWAGAT की खासियत यह थी कि मुख्यमंत्री स्तर पर नागरिकों की शिकायतों की समीक्षा की जाती थी। यानी तकनीक को सिर्फ सरकारी कामकाज का हिस्सा बनाने के बजाय उसे governance और grievance redressal से जोड़ा गया।
SWAGAT से PRAGATI तक पहुंचा मॉडल
गुजरात में शुरू हुआ यह प्रयोग बाद में राष्ट्रीय स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था का आधार बना। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद इसी सोच को बड़े पैमाने पर PRAGATI के जरिए आगे बढ़ाया गया।
PRAGATI का पूरा नाम Pro-Active Governance and Timely Implementation है। यह एक technology-enabled platform है, जिसके जरिए केंद्र और राज्यों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स, सरकारी योजनाओं और शिकायतों की समीक्षा की जाती है।
इसका उद्देश्य सिर्फ बैठक करना नहीं, बल्कि अटके हुए प्रोजेक्ट्स की समस्या पहचानना, अलग-अलग विभागों के बीच coordination कराना और implementation में तेजी लाना है।
दिसंबर 2025 में हुई PRAGATI की 50वीं बैठक के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया था कि इसके ecosystem के जरिए एक दशक में 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति देने में मदद मिली।
यानी 25 साल की इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह रहा कि गुजरात में जनता की शिकायतों को technology के जरिए हल करने का प्रयोग आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़े development projects की monitoring तक पहुंच गया।
2014: गुजरात मॉडल से राष्ट्रीय विकास की राजनीति
2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। यहीं से विकास की यह कहानी राज्य से निकलकर पूरे देश के स्तर पर पहुंची।
प्रधानमंत्री के रूप में शुरुआती दौर में ‘सबका साथ, सबका विकास’ जैसे नारों के जरिए विकास को व्यापक सामाजिक आधार से जोड़ने की कोशिश की गई।
इसी समय कई बड़े कार्यक्रम सामने आए। प्रधानमंत्री जनधन योजना के जरिए बैंकिंग व्यवस्था को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। स्वच्छ भारत मिशन ने sanitation और cleanliness को बड़े जन-अभियान का रूप दिया। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने गरीब परिवारों की महिलाओं को LPG connection देने को welfare और ease of living के मुद्दे से जोड़ा।
इसके साथ Make in India, Digital India, Skill India और Startup India जैसे कार्यक्रमों के जरिए manufacturing, technology, entrepreneurship और रोजगार को development narrative का हिस्सा बनाया गया।
यानी विकास का मतलब अब केवल सड़क, बिजली और उद्योग नहीं रहा। इसमें बैंक खाता, गैस कनेक्शन, शौचालय, डिजिटल सेवाएं और सरकारी योजनाओं की delivery भी शामिल होती गई।
2019 के बाद: विकास के साथ ‘सबका विश्वास’
2019 में दूसरी बार केंद्र में सरकार बनने के बाद विकास की इस narrative में welfare के साथ infrastructure और बड़े structural reforms का जोर भी दिखाई दिया।
इसी दौर में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ का इस्तेमाल व्यापक governance vision को बताने के लिए किया गया।
सरकार की ओर से जल जीवन मिशन, आवास, बिजली, स्वास्थ्य, किसान सहायता और financial inclusion जैसी योजनाओं को last-mile delivery से जोड़कर पेश किया गया।
इसी समय डिजिटल infrastructure ने भी बड़ा विस्तार देखा। UPI जैसे digital public infrastructure ने रोजमर्रा के लेन-देन को बदल दिया। सरकार की development story में technology अब सिर्फ governance का tool नहीं बल्कि economic activity और public services का आधार भी बनने लगी।
कोरोना के बाद ‘आत्मनिर्भर भारत’
2020 में कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया। भारत में भी इस दौर के बाद development narrative में एक नया शब्द मजबूती से सामने आया—आत्मनिर्भर भारत।
इसका फोकस domestic manufacturing, supply chains, local production और strategic sectors में भारत की क्षमता बढ़ाने पर रखा गया।
इस दौर में Production Linked Incentive यानी PLI जैसी नीतियों के जरिए manufacturing को बढ़ावा देने की कोशिश हुई। मोबाइल फोन, electronics, pharmaceuticals, automobiles और कई दूसरे sectors को production बढ़ाने और investment आकर्षित करने के लिए incentives दिए गए।
इससे development story में एक और बदलाव आया—अब सिर्फ welfare और infrastructure की बात नहीं थी, बल्कि भारत को production और manufacturing hub बनाने की बात भी होने लगी।
Infrastructure बना विकास की बड़ी तस्वीर
इन 25 वर्षों की development narrative में infrastructure लगातार एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। सड़क, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, बंदरगाह और expressway जैसे projects को economic growth से जोड़ा गया। इसके साथ logistics और connectivity को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया। सरकार ने infrastructure expansion को रोजगार, investment और व्यापार की गति से जोड़कर देखा। यानी विकास का मॉडल धीरे-धीरे तीन स्तरों पर दिखाई देने लगा—आम लोगों तक सुविधाओं की पहुंच, देश में infrastructure का विस्तार और economy की productive capacity बढ़ाना।
2024 के बाद: ‘Viksit Bharat 2047’ का लक्ष्य
2024 के बाद विकास की कहानी का सबसे बड़ा long-term framework Viksit Bharat 2047 बन गया। इसका लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की कल्पना से जुड़ा है। यानी आज की योजनाओं को केवल अगले पांच या दस साल के लक्ष्य के तौर पर नहीं, बल्कि आजादी के 100 साल पूरे होने तक की लंबी यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है। इस vision में economic growth के साथ infrastructure, technology, manufacturing, social development, innovation और human capital जैसे क्षेत्रों को महत्व दिया जाता है।
7 अक्टूबर 2026 को 25 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी 25 वर्षों की governance journey को infrastructure, digital technology, manufacturing और social welfare से जोड़ते हुए Viksit Bharat 2047 की दिशा में मजबूत आधार तैयार होने की बात कही।
तो 25 साल में असल में क्या बदला?
अगर पूरी यात्रा को एक timeline में समझें तो development narrative का बदलाव कुछ इस तरह दिखाई देता है—
2001-2014: गुजरात में governance, infrastructure और development model
2003: SWAGAT के जरिए technology-based grievance redressal
2014 के बाद: विकास को national governance agenda बनाना
2014-2019: Jan Dhan, Swachh Bharat, Ujjwala, Digital India और Make in India जैसे बड़े programmes
2019 के बाद: welfare के साथ infrastructure और structural reforms
2020 के बाद: आत्मनिर्भर भारत और domestic manufacturing पर जोर
2024 के बाद: Viksit Bharat 2047 के long-term vision की तरफ बढ़ना
इस पूरी यात्रा में एक चीज लगातार दिखाई देती है—technology और governance को development के साथ जोड़ना। गुजरात में नागरिकों की शिकायत सुनने के लिए शुरू हुआ SWAGAT बाद में national-level project monitoring के PRAGATI model से जुड़ा और अब development की चर्चा Viksit Bharat 2047 जैसे लंबे लक्ष्य तक पहुंच चुकी है।
25 साल की कहानी का अगला पड़ाव क्या?
नरेंद्र मोदी के 25 साल के राजनीतिक-प्रशासनिक सफर को सिर्फ एक पद से दूसरे पद तक पहुंचने की कहानी के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह एक ऐसे development narrative की यात्रा भी है, जिसमें समय के साथ priorities का दायरा बढ़ता गया।
गुजरात में governance और grievance redressal से शुरू हुई बात national infrastructure, welfare delivery, digital economy, manufacturing और आत्मनिर्भरता तक पहुंची। अब इसका अगला बड़ा लक्ष्य 2047 का विकसित भारत है।
यानी SWAGAT से शुरू हुई technology-driven governance की सोच, PRAGATI से project monitoring तक पहुंची और अब Viksit Bharat 2047 के बड़े vision में समाहित दिखाई देती है।