नई दिल्ली: देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर अब ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और लेटलतीफी कम करने की तैयारी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे सात व्यस्त रेल रूटों को चार-चार ट्रैक वाले सुपरफास्ट रेल नेटवर्क में विकसित करने का प्लान सामने रखा है। इन कॉरिडोर से दिल्ली, मुंबई, हावड़ा, चेन्नई, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, पटना, गुवाहाटी समेत कई बड़े शहरों की कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि ये बुलेट ट्रेन कॉरिडोर नहीं होंगे, लेकिन इन पर वंदे भारत, तेजस, राजधानी और अन्य तेज रफ्तार ट्रेनों को मौजूदा नेटवर्क की तुलना में ज्यादा गति से चलाने में मदद मिलेगी।

देश के 7 सबसे व्यस्त रूट होंगे 4-ट्रैक
रेलवे जिन सात प्रमुख नेटवर्क को चार ट्रैक वाला बनाने की दिशा में काम कर रहा है, उनमें दिल्ली-हावड़ा, हावड़ा-चेन्नई, चेन्नई-मुंबई, मुंबई-दिल्ली, दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-हावड़ा, दिल्ली-गुवाहाटी का नाम शामिल है, रेलवे के मुताबिक ये रूट कुल रेल नेटवर्क का करीब 16 फीसदी हिस्सा हैं, लेकिन इनसे लगभग 41 फीसदी यात्री ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में इन कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना बेहद अहम माना जा रहा है।

कानपुर-लखनऊ से पटना और गोरखपुर तक असर
चार ट्रैक वाले सुपरफास्ट नेटवर्क का फायदा उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहरों को भी मिल सकता है। दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज जैसे शहरों के साथ पटना और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले रेल यातायात को बेहतर क्षमता मिलने की उम्मीद है। व्यस्त रूट पर अलग-अलग श्रेणी की ट्रेनों के लिए पर्याप्त ट्रैक उपलब्ध होने से तेज ट्रेनों को बार-बार दूसरी ट्रेनों के पीछे चलने या उन्हें रास्ता देने के लिए रुकने की जरूरत कम होगी।

200+ किमी प्रति घंटे की रफ्तार की तैयारी?
रेलवे का लक्ष्य मौजूदा व्यस्त नेटवर्क पर ट्रेनों की औसत गति और संचालन क्षमता बढ़ाना है। ऐसे कॉरिडोर पर बेहतर ट्रैक और इंफ्रास्ट्रक्चर से वंदे भारत, राजधानी और तेजस जैसी ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की गुंजाइश बनेगी। हालांकि, यह बुलेट ट्रेन नेटवर्क नहीं है। 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर अलग परियोजनाएं हैं। चार-ट्रैक सुपरफास्ट नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य मौजूदा रेल लाइनों की क्षमता बढ़ाकर तेज और समयबद्ध ट्रेन संचालन करना है।

घंटों की लेटलतीफी से मिल सकती है राहत
अभी कई व्यस्त रेल मार्गों पर दो या तीन ट्रैक होने के कारण तेज ट्रेनों को भी दूसरी ट्रेनों के लिए इंतजार करना पड़ता है। मालगाड़ी, पैसेंजर और सुपरफास्ट ट्रेनों के एक ही नेटवर्क पर चलने से परिचालन प्रभावित होता है। चार ट्रैक होने पर अलग-अलग ट्रेनों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इससे वंदे भारत और राजधानी जैसी ट्रेनों के लिए रास्ता आसान होगा। ट्रेनों की लेटलतीफी कम करने में मदद मिलेगी। त्योहारों में स्पेशल ट्रेनें चलाना आसान होगा। यात्री ट्रेनों की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी।

मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी, घटेगी लॉजिस्टिक्स लागत
इस योजना का फायदा सिर्फ यात्रियों को नहीं बल्कि उद्योग और कारोबार को भी मिलेगा। कोयला, सीमेंट, स्टील और कंटेनर जैसी जरूरी वस्तुओं को ले जाने वाली मालगाड़ियों के लिए अलग क्षमता उपलब्ध होने से माल ढुलाई तेज हो सकती है। इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही रेलवे बढ़ते यात्री ट्रैफिक और माल ढुलाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने सबसे व्यस्त कॉरिडोर की क्षमता बढ़ा सकेगा। यानी आने वाले समय में देश के सबसे व्यस्त रेल रूटों पर सिर्फ ट्रेनें नहीं, बल्कि पूरी रेल व्यवस्था ज्यादा तेज और ज्यादा व्यवस्थित नजर आ सकती है। 

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