मौसम बदलते ही कई लोगों को जुकाम, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, थकान या बुखार जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। अक्सर माना जाता है कि बदलता मौसम ही बीमारी की वजह है, लेकिन असल में तापमान और नमी में बदलाव शरीर की अनुकूलन क्षमता और मौसमी संक्रमणों के जोखिम को प्रभावित कर सकता है।
मौसम बदलने पर शरीर पर क्या असर पड़ता है?
तापमान और नमी में अचानक बदलाव होने पर शरीर को नए वातावरण के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। गर्म जगह से अचानक ठंडे एसी वाले कमरे में जाना या सुबह ठंडी हवा के संपर्क में आना गले और सांस की नली में जलन पैदा कर सकता है। इससे छींक, खांसी, नाक बंद होना और गले में खराश जैसी परेशानी हो सकती है।
ठंड में क्यों बढ़ता है संक्रमण?
ठंड और कम नमी वाले मौसम में कुछ वायरस लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं। इसके अलावा मौसम बदलने पर धूल, परागकण और फफूंद जैसे एलर्जेंस भी परेशानी बढ़ा सकते हैं। अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों में इसके लक्षण अधिक दिखाई दे सकते हैं।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी चाहिए?
बच्चे, बुजुर्ग, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग और सांस संबंधी बीमारी से परेशान लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बाहर और अंदर के अलग-अलग तापमान में बार-बार रहने वालों को भी अचानक बदलाव से परेशानी हो सकती है।
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बचाव के 5 आसान टिप्स
लेयर वाले कपड़े पहनें: तापमान के अनुसार कपड़े कम या ज्यादा कर सकें।
पर्याप्त पानी पिएं: ठंड में भी हाइड्रेशन बनाए रखें।
नींद पूरी करें: नियमित और पर्याप्त नींद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करती है।
हाइजीन का ध्यान रखें: हाथों को नियमित रूप से धोएं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें।
घर में वेंटिलेशन रखें: कमरे की हवा को ताजा रखने के लिए कुछ समय खिड़कियां खोलें।
इसके अलावा संतुलित आहार लें और जरूरत से ज्यादा एसी या हीटर का इस्तेमाल न करें। लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
Declaimer: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें।