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टॉयलेट में जोर लगाने की आदत को न करें नजरअंदाज...शरीर के इन हिस्सों पर पड़ता है असर

टॉयलेट में बार-बार ज्यादा जोर लगाने की आदत को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। कब्ज और गलत टॉयलेट हैबिट्स की वजह से बवासीर, एनल फिशर और रेक्टल प्रोलैप्स जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। जानिए शौच के दौरान जोर लगाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

टॉयलेट में जोर लगाने की आदत को न करें नजरअंदाज...शरीर के इन हिस्सों पर पड़ता है असर
टॉयलेट में बार-बार ज्यादा जोर लगाने की आदत को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। कब्ज और गलत टॉयलेट हैबिट्स की वजह से…

रोजाना सुबह टॉयलेट जाना सामान्य दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन अगर टॉयलेट के दौरान बार-बार ज्यादा जोर लगाना पड़े और पेट ठीक से साफ न हो, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कब्ज, कम पानी पीना, कम फाइबर वाला भोजन या लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहने जैसी आदतें इस समस्या को बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक जोर लगाने से शरीर के कई हिस्सों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

बवासीर और एनल फिशर का खतरा

टॉयलेट के समय लगातार दबाव बनाने से गुदा के आसपास की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे उनके सूजने का खतरा बढ़ता है, जिसे बवासीर यानी पाइल्स की समस्या से जोड़ा जाता है। कठोर मल और बार-बार जोर लगाने के कारण गुदा की अंदरूनी त्वचा में छोटे घाव या दरारें भी बन सकती हैं। इन्हें एनल फिशर कहा जाता है। ऐसी स्थिति में शौच करते समय तेज दर्द, जलन या खून आने जैसी शिकायत हो सकती है। अगर समस्या बनी रहे तो घाव भरने में परेशानी होती है और मांसपेशियों में ऐंठन के कारण तकलीफ लगातार बढ़ सकती है।

रेक्टल प्रोलैप्स का भी खतरा

लगातार जोर लगाने का प्रभाव केवल गुदा तक सीमित नहीं रहता। बार-बार अत्यधिक दबाव पड़ने से पेल्विक फ्लोर और आसपास के ऊतकों पर भी असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में रेक्टम का हिस्सा गुदा के रास्ते बाहर की ओर आने लगता है, जिसे रेक्टल प्रोलैप्स कहा जाता है। यह स्थिति शुरुआती दौर में हल्की लग सकती है, लेकिन बढ़ने पर काफी परेशानी पैदा कर सकती है। गंभीर मामलों में उपचार के लिए सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है। इसलिए लंबे समय से शौच में दिक्कत, बाहर की ओर कोई उभार महसूस होना या टॉयलेट पर नियंत्रण से जुड़ी समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

दिल पर भी पड़ सकता है असर

टॉयलेट के दौरान बहुत ज्यादा जोर लगाने से शरीर के अंदर दबाव अचानक बढ़ सकता है। इसे वल्साल्वा मैन्युवर कहा जाता है। इसके दौरान थोड़े समय के लिए रक्तचाप और हृदय तक रक्त के प्रवाह में बदलाव हो सकता है। स्वस्थ लोगों में यह अक्सर अस्थायी होता है, लेकिन हृदय या रक्तचाप से जुड़ी बीमारी वाले लोगों में अत्यधिक जोर लगाना विशेष रूप से चिंता का विषय हो सकता है।

कब्ज से बचने के लिए क्या करें?

टॉयलेट के दौरान जोर लगाने की जरूरत कम करने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव किया जा सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, भोजन में फाइबर बढ़ाना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना मददगार हो सकता है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। टॉयलेट की इच्छा होने पर उसे बार-बार टालने से भी बचना चाहिए। साथ ही जरूरत से ज्यादा देर तक टॉयलेट में बैठकर मोबाइल चलाने जैसी आदत छोड़ना बेहतर है।

कब्ज और टॉयलेट की समस्या को लंबे समय तक न करें नजरअंदाज

अगर कब्ज या टॉयलेट में परेशानी कई दिनों या हफ्तों से लगातार बनी हुई है, बार-बार खून आता है, तेज दर्द होता है या बिना ज्यादा जोर लगाए टॉयलेट नहीं हो पाता, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय रहते कारण का पता लगाने और सही उपचार लेने से समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।  

 

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  Written By Toshi Shah  

Rajeev Singh

आपके दिए हुए प्रोफाइल को **राजीव सिंह** और **TNP News** के अनुसार ढालकर, NBT/Times of India से जुड़े संदर्भ हटाकर इस तरह किया जा सकता है: ## राजीव सिंह, TNP News में एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। राजीव सिंह TNP News में एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज और रिसर्च आधारित खबरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और एंटरटेनमेंट समेत विभिन्न कैटेगरी की खबरों से जुड़े होते हैं। किसी भी विषय पर स्टोरी तैयार करते समय शरद दीक्षित रिसर्च, डीप डाइव, फैक्ट चेक, वैल्यू एड और विशेषज्ञों की राय को विशेष महत्व देते हैं। TNP News के लिए वे महत्वपूर्ण और चर्चित मुद्दों पर विश्लेषणात्मक एवं रियल टाइम स्टोरीज तैयार करते हैं। उनका फोकस किसी भी खबर को केवल प्रस्तुत करने के बजाय उसके पीछे की पूरी कहानी, तथ्यों और उसके संभावित प्रभाव को पाठकों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर रहता है। राजीव सिंह को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन की खबरों पर लगातार नजर रखने का अनुभव है। किसी भी खबर पर उनकी पहली प्राथमिकता तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी होती है। इसके बाद वे यह समझने पर जोर देते हैं कि उस खबर का समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। ### पत्रकारिता का अनुभव राजीव सिंह ने पत्रकारिता के क्षेत्र में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, इंटरव्यू, रिसर्च, डिजिटल कंटेंट और स्पेशल स्टोरीज जैसी विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। अपने पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने समाचारों के पारंपरिक माध्यमों के साथ-साथ डिजिटल पत्रकारिता की बदलती जरूरतों और नई तकनीकों को भी करीब से समझा है। उन्होंने राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों को कवर करने के साथ-साथ राजनीतिक घटनाक्रम, चुनाव, सामाजिक विषयों, प्रशासनिक मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। TNP News में राजीव सिंह का प्रमुख फोकस रिसर्च आधारित पत्रकारिता, एक्सप्लेनर स्टोरी, डीप डाइव, स्पेशल स्टोरी और तथ्यपरक विश्लेषण पर है। उनका प्रयास रहता है कि जटिल और महत्वपूर्ण विषयों को आसान भाषा में इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि पाठक खबर के साथ-साथ उसके कारण, प्रभाव और पूरे संदर्भ को भी समझ सके। ### पत्रकारिता का दृष्टिकोण राजीव सिंह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड पर उनकी लगातार नजर रहती है। वे खबर के तत्काल प्रभाव के साथ-साथ उसके दीर्घकालिक प्रभाव को भी समझने और पाठकों के सामने रखने पर जोर देते हैं। उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि पाठकों को **खबर के पीछे की कहानी, तथ्य और उसका असर** समझाना है। ### TNP News में भूमिका TNP News में राजीव सिंह एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज, डीप डाइव और रिसर्च आधारित कंटेंट के साथ काम कर रहे हैं। वे महत्वपूर्ण घटनाओं और ट्रेंडिंग मुद्दों पर रियल टाइम एक्सप्लेनर और विश्लेषणात्मक स्टोरी तैयार करने के साथ डिजिटल ऑडियंस की जरूरतों के अनुसार कंटेंट को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने पर ध्यान देते हैं। TNP News के माध्यम से उनका प्रयास ऐसी पत्रकारिता को आगे बढ़ाना है जिसमें **तथ्य, रिसर्च, निष्पक्ष विश्लेषण और जनसरोकार** को प्राथमिकता मिले।

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