Education News: आज के दौर में शिक्षा के क्षेत्र में कई अहम बदलाव देखने को मिल रही हैं। जहां पहले पढ़ाई स्लेट से शुरु हुआ और कॉपी- किताबों तक पहुंची। तो वहीं शिक्षा का दौर आज बदलाव आज बच्चों को भी पसंद आ रहा है। जहां अंग्रेजी सीखने के लिए हर कोई आगे आ रहा है। लेकिन आज के समय में कुछ अलग करने के लिए Coding और Maths के पीछे जनरेशन ज्यादा दौड़ती दिखाई दे रही है। कुछ लोग इस बात को लेकर भी चिंतित है कि आखिर उनके बच्चों के लिए क्या सिखना बेहतर होगा। मतलब कोडिंग या मैथ?


AI के दौर में कोडिंग से पहले गणित

आज प्रतिस्पर्धा के दौर में कोडिंग स्किल का नई जरनेशन में जबर्दस्त क्रेज है। पैरेंट्स भी अपने बच्चों के लिए इसे आने वाले समय में अनिवार्य स्किल के तौर पर मान रहे हैं। पैरेंट्स को कोडिंग में अपने बच्चे का सुनहरा भविष्य दिखाई देता है। स्कूलों से लेकर ऑनलाइन क्लासेज तक, कम उम्र में कोडिंग स्किल सिखाने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन AI कोडिंग जैसे स्किल को तेजी से ग्रहण कर रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों के लिए टेक्निकल स्किल जरूरी है या बुनियादी क्षमताएं जो टेक्नोलॉजी बदलने में काम आती हैं?

गणित बच्चों को समझाता है सॉल्यूशन करना

माता-पिता के सामने बच्चों के भविष्य को लेकर कई सवाल है। माता-पिता बच्चों को मैथ्स, रीजनिंग और प्रॉबलम सॉल्विंग स्किल्स आखिर क्या सीखाएं या कोडिंग और टेक्नोलॉजी स्पेसिफिक स्किल बच्चों के लिए जरूरी है। आजकल AI बेस्ड बॉट मिनट भर में कोडिंग कर देता है। लेकिन समस्या को समझने के लिए उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना, पैटर्न पहचानना, लॉजिक लगाना और सही सॉल्यूशन तक पहुंचना इन सभी पर अपनी क्षमताओं के हिसाब से काम को सिखना आज हर बच्चे के माता पिता की पहली प्राथमिकता हैं। आज बच्चे नई टेक्नोलॉजी में भी नई स्किल तेजी से सीख सकते है। ऐसे में सबसे जरूरी यही है कि बच्चों के लिए कोडिंग से पूर्व मैथ्स आखिर क्यों जरूरी है?


कोडिंग से पहले मैथ्स बच्चों के लिए क्यों जरूरी?

बुनियादी गणित की समझ होना जरूरी- बच्चों को गणना, संख्याओं और मात्रा की शुरुआती समझ उनकी नींव मजबूत करती है।

लॉजिकल रीजनिंग विकसित होती है- गणित बच्चों को चीजों के बीच संबंध समझने और तार्किक तरीके से सोचने में मदद करता है।

If-Then लॉजिक समझने में आसानी- मात्रा, क्रम और पैटर्न की समझ आगे चलकर कोडिंग के ‘अगर-तो’ वाले लॉजिक को समझने में मदद करती है।

पैटर्न पहचानने की क्षमता- गणित में पैटर्न समझना जरूरी है, यही क्षमता प्रोग्रामिंग में दोहराए जाने वाले कोड और नियम समझने में काम आती है।

समस्या समाधान और कौशल- गणित विषय बच्चों की समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर समाधान कैसे निकाला जाए यह सिखाता है।

स्पैटियल अवेयरनेस में वृद्धि- दूरी, दिशा और आकृतियों की बेहतर समझ होना। बच्चों के लिए ग्राफिक्स, गेम डिजाइन और रोबोटिक्स जैसी कोडिंग बड़ी मदद करती है।

क्रम समझना- गणित बच्चों को सही क्रम सिखाती है। जो प्रोग्रामिंग में आगे उनक लिए मददगार साबित होती है।

अमूर्त सोच- गणित बच्चों के अंदर कई ऐसी चीजों पर विचार करने की मदद करता है, जिन्हें वे सीधे छू और देख नहीं सकते।

कोडिंग सिंटैक्स से ज्यादा बच्चों को कॉन्सेप्ट पर फोकस करने में देता है मदद- अगर बच्चे का गणित और तार्किक समझ बेहतरीन है, तो वह कोडिंग और कमांड को सरलता से सीख सकता है।

STEM शिक्षा की नींव- मजबूत मैथ्स बच्चों को कोडिंग, AI, डेटा साइंस, रोबोटिक्स और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को समझने में मदद करता है।

एनालिटिकल थिंकिंग मजबूत

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की फ्यूचर जॉब्स रिपोर्ट 2025 के मुताबिक 1000 से ज्यादा कंपनियों के सर्वे से आंकड़े जुटाए गए थे। जिसमें एनालिटिकल थिंकिंग को 69% एम्प्लॉयर्स ने कोर स्किल माना। इसे लिस्ट में सबसे ऊपर माना गया। क्रिएटिव थिंकिंग 57% और टेक्नोलॉजिकल लिटरेसी 51% पर, प्रोग्रामिंग महज 17% पर रहे। इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि टेक्नोलॉजी से जुड़ी स्किल्स भी अहम हैं। एनालिटिकल थिंकिंग की मांग उससे कहीं ज्यादा बड़ी है।

गणित महज कैलकुलेशन नहीं

ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट, प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट फ्रेमवर्क भी गणित को महज कैलकुलेशन तक सीमित नहीं मानता। उनका कहना है कि मैथमेटिकल लिटरेसी वास्तविक जीवन में आने वाली परेशानियों को समझाने में मदद करती हैं। मैथमेटिकल रीजनिंग करना और साक्ष्य के हिसाब का आकलन कर फैसला लेना बेहद जरूरी है। PISA 2022 के क्रिएटिव थिंकिंग रिजल्ट में भी मैथ्स और क्रिएटिव थिंकिंग के बीच मजबूत संबंध मिला। OECD देशों में दोनों के बीच कोरिलेशन 0.67 था।

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