नई दिल्ली: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े व्यक्तिगत दिवाला (Personal Insolvency) मामले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। NCLT द्वारा उनकी पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा, वहीं सुभाष चंद्रा ने मामले में सामने आ रही रिपोर्टों को गलत बताते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने हाल ही में सुभाष चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले लगभग 6.5 करोड़ के भुगतान की व्यवस्था की गई है।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला
इस फैसले के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में दो अलग-अलग व्यवस्थाएं चल रही हैं-एक आम लोगों के लिए और दूसरी चुनिंदा बड़े कारोबारियों के लिए।
राहुल गांधी ने कहा कि अगर कोई किसान छोटा कर्ज नहीं चुका पाता तो उसकी जमीन पर कार्रवाई होती है, वहीं आम वेतनभोगी व्यक्ति को EMI चूकने पर दबाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों के लिए बैंकिंग व्यवस्था अलग तरीके से काम करती है।
उन्होंने NCLT को लेकर भी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि यह व्यवस्था कुछ बड़े लोगों को फायदा पहुंचा रही है।
सुभाष चंद्रा ने आरोपों पर दी सफाई
वहीं, सुभाष चंद्रा ने इन आरोपों और मीडिया रिपोर्टों पर सफाई देते हुए कहा कि उनके मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह इस प्रक्रिया में केवल व्यक्तिगत गारंटर हैं और उन्होंने खुद किसी बैंक या वित्तीय संस्था से व्यक्तिगत रूप से कोई कर्ज नहीं लिया है।
सुभाष चंद्रा के मुताबिक, NCLT प्रक्रिया में कुल दावे करीब 22,006 करोड़ रुपये के थे, लेकिन इन्हें मौजूदा बकाया राशि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पुनर्भुगतान योजना का विरोध करने वाले ऋणदाताओं के दावे करीब 3,992 करोड़ थे, जिसमें से 620 करोड़ का निपटारा हो चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन कंपनियों के लिए उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, उन्होंने अब तक करीब 43,000 करोड़ का भुगतान किया है और बाकी देनदारियों के निपटारे का भरोसा दिया है।
HDFC बैंक ने NCLT के फैसले पर जताई आपत्ति
इस मामले में HDFC बैंक ने भी NCLT के फैसले पर आपत्ति जताई है। बैंक ने कहा कि उसने पुनर्भुगतान योजना का विरोध किया था और अब वह NCLAT में अपील की संभावना तलाश रहा है। बैंक के अनुसार, उसका स्वीकार किया गया दावा कुल दावों का 3.2 प्रतिशत था।
मामले में अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कानूनी लड़ाई भी आगे बढ़ती नजर आ रही है। जहां विपक्ष इसे बड़े कारोबारियों को राहत देने से जोड़ रहा है, वहीं सुभाष चंद्रा का कहना है कि मामले के तथ्यों को सही तरीके से समझने की जरूरत है।
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