Russia Longevity Research: क्या इंसान कभी अमर हो सकता है? सदियों पुराने इस सवाल का जवाब अब रूस के वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकालने का दावा किया है। मॉस्को स्थित स्कोल्कोवो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Skoltech) की एक ताजा रिसर्च के मुताबिक, सही तकनीकों और चिकित्सा पद्धतियों के सहारे इंसान 194 साल तक जीवित रह सकता है।'एनपीजी एजिंग' जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। बता दें कि यह रिसर्च ऐसे समय में सामने आई है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अमर होने और एंटी-एजिंग (उम्र रोकने) तकनीकों को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चाएं तेज हैं।
गणितीय मॉडल से खुलासा
वैज्ञानिकों ने गणितीय मॉडल (Mathematical Model) के आधार पर स्पष्ट किया है कि इंसान पूरी तरह अमर तो नहीं हो सकता, लेकिन बुढ़ापे से लड़कर अपनी प्राकृतिक उम्र को लगभग दोगुना जरूर कर सकता है। इंसानी उम्र 'सोमैटिक म्यूटेशन' (Somatic Mutation) से तय होती है। उम्र बढ़ने के साथ DNA क्षतिग्रस्त होता है और शरीर उसकी मरम्मत नहीं कर पाता, जिससे कोशिकाएं कमजोर होती हैं और बुढ़ापा आता है। यदि शरीर को बूढ़ा करने वाले कारणों को समाप्त कर दिया जाए और गंभीर बीमारियों को जड़ से मिटा दिया जाए, तो 194 साल की उम्र पाना संभव है।
माइक्रोफोन में कैद हुआ था पुतिन और जिनपिंग का 'अमरता वाला राज'
इस रिसर्च का सीधा कनेक्शन राष्ट्रपति पुतिन के उस चर्चित बयान से जोड़ा जा रहा है, जो पिछले साल चीन में एक सैन्य परेड के दौरान लीक हुआ था। तियानमेन स्क्वायर पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन के साथ बातचीत के दौरान पुतिन का माइक्रोफोन गलती से ऑन रह गया था।
अनुवादक के जरिए पुतिन को यह कहते सुना गया था कि यदि मानव अंगों का सफल प्रत्यारोपण (Transplant) किया जा सके, तो इंसान जब तक चाहे तब तक जीवित रह सकता है... यहां तक कि अमरता भी संभव है। इस पर जिनपिंग ने भी सहमति जताते हुए कहा था कि इस सदी में इंसानों का 150 साल तक जीना संभव हो सकता है।
रूस का 2 लाख करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट
रूस सरकार 'न्यू टेक्नोलॉजीज फॉर हेल्थ प्रिजर्वेशन' नामक राष्ट्रीय परियोजना पर काम कर रही है। करीब 26 अरब डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) के बजट वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य जीन थेरेपी, बायोप्रिंटिंग, जेनोट्रांसप्लांटेशन और अन्य आधुनिक तकनीकों के जरिए उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना और गंभीर बीमारियों से लड़ना है।
किन तकनीकों पर हो रहा काम?
जीन थेरेपी से कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की गति कम करने की कोशिश।
बायोप्रिंटिंग के जरिए कृत्रिम अंग विकसित करने का प्रयास।
जेनोट्रांसप्लांटेशन के तहत आनुवंशिक रूप से संशोधित जानवरों के अंगों के उपयोग पर शोध।
क्रायोथेरेपी जैसी तकनीकों पर भी अध्ययन जारी।
पुतिन की निजी चाहत या रूस की मजबूरी?
विशेषज्ञों के इस पर दो अलग-अलग दृष्टिकोण हैं. कई जानकारों का मानना है कि 70 वर्ष से अधिक उम्र के पुतिन खुद को लंबे समय तक सत्ता में और जीवित रखने के लिए इस रिसर्च को भारी फंडिंग दे रहे हैं।0 रूस में औसत आयु (Average Life Expectancy) चिंताजनक रूप से कम है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, रूस में पुरुषों की औसत उम्र केवल 68.26 वर्ष थी (जबकि अमेरिका में 74 और पश्चिमी यूरोप में 80 वर्ष है)।
रूस की घटती आबादी और कम होती जीवन प्रत्याशा को सुधारना देश की राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुकी है। क्या रूस की यह जीन थेरेपी इंसानी इतिहास को बदलकर रख देगी, या पुतिन अमरता का स्वाद चखने वाले पहले इंसान बनेंगे? इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
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Written By Shailesh Yadav