US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब सिर्फ मिसाइल और एयरस्ट्राइक तक सीमित नहीं रह गई है। दोनों देशों के बीच तनाव का असर अब उन अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी दिखाई देने लगा है, जहां से ईरान के खिलाफ ऑपरेशन चलाए गए हैं। इसी बीच अमेरिका ने ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस से अपने करीब एक दर्जन B-1 बमवर्षक विमानों को वापस अमेरिका बुला लिया है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला संभावित ईरान-संबंधी हमले के खतरे को देखते हुए लिया गया। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है कि क्या ईरान अमेरिका से डर गया है।
क्या ईरान से डर गया अमेरिका?
RAF Fairford ब्रिटेन में अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण एयरबेस है। इस बेस का इस्तेमाल अमेरिकी भारी बमवर्षक विमानों के ऑपरेशन के लिए किया जाता रहा है और मौजूदा ईरान युद्ध में भी यहां से अमेरिकी विमानों ने मिशन किए हैं। हाल के दिनों में इस एयरबेस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।
ब्रिटिश पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया और संभावित आतंकी साजिश की जांच शुरू की। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि एयरबेस पर ड्रोन के जरिए हमला किया जा सकता है। इसी खतरे को देखते हुए वहां मौजूद B-1 विमानों को तेजी से वापस अमेरिका भेज दिया गया।
ईरान की बदली युद्ध रणनीति ने बढ़ाई चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम से एक और बात सामने आती है। आधुनिक युद्ध में सिर्फ बड़े फाइटर जेट और मिसाइल ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। छोटे ड्रोन और असममित युद्ध रणनीति भी बड़े सैन्य ठिकानों के लिए चुनौती बन सकती है।
अमेरिकी अधिकारियों को जिस संभावित ड्रोन हमले की आशंका थी, उसने यह दिखा दिया कि महंगे और शक्तिशाली सैन्य विमानों को भी जमीन पर मौजूद छोटे ड्रोन से खतरा हो सकता है। यही कारण है कि अमेरिका भी अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है।