विदेश
होर्मुज पर अमेरिकी नाकेबंदी! भारत के फंसे 15 जहाज , 48 घंटे बेहद अहम
Hormuz Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह नाकेबंदी की घोषणा कर दी है।
Hormuz Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। इसके बाद ही अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने जलडमरूमध्य के बाहर तैनाती कर दी है। वायु सेना ने भी अपनी अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों के साथ पूरे मार्ग को सील करने की कोशिश में जुटा है।
स्थिति के अनुसार भारत तय करेगा आगे की राह
हालांकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया है लेकिन क्षेत्र में स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। एक बड़ा कारण समुद्र में ईरान की ओर से लगाए गए बारूद भी हैं। भारत स्थिति को देखकर आगे की राह तय करेगा।
होर्मुज में भारत के 15 जहाज फंसे
भारत के अनुसार अगर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होते हैं तो यह उसके लिए फायदेमंद साबित होगा। क्योंकि नाकेबंदी केवल ईरानी बंदरगाहों से आने वाले जहाजों तक सीमित है। ईरान के साथ भारत का कारोबार बहुत सीमित है। और जो होर्मुज में भारत के 15 जहाज फंसे हैं वो सभी गैर-ईरानी बंदरगाहों से तेल, गैस ले कर आ रहे हैं।
अमेरिकी नाकेबंदी पर स्थिति साफ नहीं
सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी नाकेबंदी पर स्थिति साफ होने का इंतजार कर रही है। क्योंकि अमेरिका ने बाहर अपने नौसेना जहाजों को तैनात कर दिया है। हालांकि इससे जहाजों को सुरक्षित निकालने की कोई गारंटी नहीं है। खासतौर पर समुद्र में बिछाए गए बारूदी सुरंगों से सुरक्षित बाहर निकलना बेहद मुश्किल है, और ये सुरंगे ईरान ने बिछाई हैं। ऐसे में होर्मुज से जहाजों को निकालने की क्या व्यवस्था है, इसकी स्थिति अगले 24 से 48 घंटों में साफ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिका-इजरायल हमले से होर्मुज बुरी तरह
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में बुरी तरह प्रभावित हो गई है। यह मार्ग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। विश्व की करीब 20 फीसद कच्चे तेल की आपूर्ति इसी जलमार्ग से होकर गुजरती है, जिसमें भारत का बड़ा हिस्सा शामिल है।
होर्मुज भारत के लिए सबसे सस्ता विकल्प
जानकारी के अनुसार भारत पहले खाड़ी देशों से 60 फीसदी तेल खरीदता था। अब विविधीकरण की नीति के तहत सिर्फ 30 फीसदी रह गया है। लेकिन अब 70 फीसदी तेल रूस, अमेरिका, मैक्सिको, नाइजीरिया और गुयाना जैसे देशों से आ रहा है। यह बदलाव पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के वजह से दिखा है। फिर भी, खाड़ी क्षेत्र से आने वाला तेल भारत के लिए सबसे सस्ता विकल्प है।
खाड़ी क्षेत्र से जहाज महज 7 दिनों पहुंच जाते हैं
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से जहाज भारत पहुंचने में तीन से चार हफ्ते, रूस से तीन हफ्ते और नाइजीरिया से कम से कम दो हफ्ते लगते हैं। वहीं, खाड़ी क्षेत्र से मात्र चार से 7 दिनों में जहाज भारतीय तट पर पहुंच जाते हैं। अभी होर्मुज क्षेत्र में भारत के 15 जहाज फंसे हुए हैं, जो अन्य बंदरगाहों से तेल, गैस और अन्य सामान ले कर आ रहे हैं।
Written By: Geeta Sharma
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