UNHRC में पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप, पश्तून एक्टिविस्ट ने उठाए मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे

जिनेवा (स्विट्जरलैंड): पश्तून एक्टिविस्ट फजल-उर-रहमान अफरीदी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान पाकिस्तान सरकार और सेना पर जातीय अल्पसंख्यकों, खासकर पश्तून और बलोच समुदायों के खिलाफ गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।

अफरीदी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) के पश्तून बहुल इलाकों में जबरन गायब किए जाने (Enforced Disappearances), कथित फर्जी मुठभेड़ों और ड्रोन व हेलीकॉप्टर हमलों जैसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।

उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में आम नागरिकों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, की जान गई है। अफरीदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की अपील की और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने की मांग की।

पाकिस्तान सेना पर आतंकियों को संरक्षण देने का आरोप

अफरीदी ने पाकिस्तान की सेना पर आरोप लगाया कि वह खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान से जुड़े क्षेत्रों में आतंकी संगठनों को समर्थन और संरक्षण दे रही है।

उन्होंने बन्नू और लक्की मरवत के पुलिस अधिकारियों के कथित बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि सुरक्षा बलों पर सैन्य छावनी क्षेत्रों में आतंकियों को शरण देने के आरोप लगे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ सैन्यकर्मी नागरिक इलाकों में भेष बदलकर गतिविधियां चला रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असुरक्षा का माहौल पैदा हो रहा है।

PTM नेताओं की गिरफ्तारी और गुमशुदगी का मुद्दा उठाया

पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर भी अफरीदी ने चिंता जताई।

उन्होंने आरोप लगाया कि PTM नेताओं को झूठे मामलों में गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुछ कार्यकर्ताओं के जबरन गायब होने की शिकायतें सामने आई हैं।

उन्होंने PTM नेता मंजूर अहमद पश्तीन की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान सरकार से हिरासत में लिए गए या लापता कार्यकर्ताओं की स्थिति और ठिकाने की जानकारी देने की मांग की।

खनिज संसाधनों को लेकर भी लगाए आरोप

अफरीदी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का सुरक्षा तंत्र पश्तून इलाकों को अस्थिर करने, स्थानीय आबादी को विस्थापित करने और खनिज संपदा वाले क्षेत्रों पर नियंत्रण हासिल करने की रणनीति अपना रहा है।

उन्होंने दावा किया कि खनिज संसाधनों से होने वाली आय का लाभ पाकिस्तान के खजाने के बजाय वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों तक पहुंच रहा है।

पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव की मांग

UNHRC में दिए अपने बयान में अफरीदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान में मानवाधिकार स्थिति पर ध्यान देने और कथित उल्लंघनों की जांच की मांग की।

हालांकि, पाकिस्तान सरकार और सेना पहले भी इस तरह के आरोपों को खारिज करती रही है और सुरक्षा अभियानों को आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए जरूरी कदम बताती रही है।

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